रांची , जुलाई 23 -- झारखंड के पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के खांमडीह और पूर्णाडीह क्षेत्र के बीच 12 मिलियन टन (1.2 करोड़ टन) उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट का विशाल भंडार मिलने से राज्य के खनन क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल गई हैं।

खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार यह पलामू प्रमंडल में अब तक खोजा गया सबसे बड़ा ग्रेफाइट भंडार है।

खनन विभाग द्वारा कराए गए विस्तृत ड्रिलिंग और जीपीएस सर्वेक्षण में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ग्रेफाइट की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र उरांव ने बताया कि इस ग्रेफाइट का ग्रेड 7.7 दर्ज किया गया है और इसमें लगभग 80 प्रतिशत तक कार्बन मौजूद है, जो इसे औद्योगिक उपयोग के लिए बेहद मूल्यवान बनाता है।

विभाग ने संबंधित ब्लॉक का डिमार्केशन और मैपिंग का कार्य पूरा कर लिया है। अब तकनीकी समिति के मूल्यांकन के बाद केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप इसकी नीलामी के लिए प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ग्रेफाइट का उपयोग अब केवल पेंसिल बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। यह परमाणु उद्योग में न्यूक्लियर रिएक्टरों के मॉडरेटर के रूप में तथा इलेक्ट्रिक वाहनों और स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों के एनोड निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पलामू में मिला यह उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट इन उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगा।

इस खोज से स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य शुरू होने पर 200 से 300 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि परिवहन, ठेका, व्यापार और अन्य गतिविधियों के माध्यम से सैकड़ों लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

ग्रामीण उमेश सिंह और मालदेव सिंह ने बताया कि पहले क्षेत्र में छोटी ग्रेफाइट खदानें संचालित होती थीं, लेकिन उनके बंद होने के बाद लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता था। अब नए भंडार की खोज से पलायन पर रोक लगने की उम्मीद है।

वैश्विक स्तर पर ग्रेफाइट की बढ़ती मांग को देखते हुए पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों की वर्षों से बंद पड़ी ग्रेफाइट खदानों के दोबारा शुरू होने की संभावना भी मजबूत हुई है।

डाल्टनगंज के विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि सतबरवा में मिला नया भंडार क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार का नया द्वार खोलेगा। उन्होंने बताया कि चैनपुर के सोहदा क्षेत्र में 1980 के दशक से बंद पड़ी ग्रेफाइट खदानों को फिर से शुरू कराने के लिए अधिकारियों और केंद्र सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

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