रांची , अक्टूबर 13 -- झारखंड में वर्ष 2027 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया में देरी का असर पड़ता दिखाई दे रहा है।

राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव समय पर कराने की तैयारी में जुटा है, लेकिन मतदाता सूची और आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अप्रैल-मई 2027 में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

राज्य निर्वाचन आयोग प्रारंभिक तैयारियों के तहत मतदान केंद्रों के गठन की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। हालांकि, चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम रूप से तैयार होना और विभिन्न पदों के लिए आरक्षण निर्धारित होना जरूरी है।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद के अनुसार, पंचायत चुनाव भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाते हैं। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने और नई मतदाता सूची जारी होने के बाद ही पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का मतदान केंद्रवार बिखंडन किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया में लगभग तीन से चार महीने का समय लगता है। ऐसे में मतदाता सूची तैयार होने में देरी से चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

झारखंड में वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल जून 2027 में समाप्त हो रहा है। राज्य में 4,346 ग्राम पंचायतें, 264 पंचायत समितियां और 24 जिला परिषदें हैं। पिछला पंचायत चुनाव मई 2022 में चार चरणों में कराया गया था। आगामी चुनाव में वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पदों के लिए मतदान होना है। इस बार भी बैलेट पेपर से मतदान कराने की तैयारी है। आयोग ने सभी जिलों से बैलेट बॉक्स की उपलब्धता की जानकारी मांगी है।

पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ट्रिपल टेस्ट जरूरी है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सचिव विनोद कुमार बांके के अनुसार, आयोग सरकार के निर्देश का इंतजार कर रहा है। पंचायत स्तर पर पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाने और आरक्षण निर्धारित करने में समय लग सकता है।

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने सरकार से जल्द ट्रिपल टेस्ट शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे ओबीसी वर्ग को आरक्षण का उचित लाभ मिल सकेगा।

ट्रिपल टेस्ट के तहत स्वतंत्र आयोग की व्यवस्था, पिछड़ेपन के वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन और उनके आधार पर आरक्षण निर्धारण किया जाता है। साथ ही कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा संबंधी न्यायिक निर्देशों का ध्यान रखना होता है।

झारखंड में पंचायत चुनाव पहले भी टल चुका है। वर्ष 2020 में प्रस्तावित चुनाव कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक कारणों से नहीं हो सका था। अब एसआईआर और ट्रिपल टेस्ट में देरी के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या अप्रैल-मई 2027 में चुनाव हो पाएगा या इसकी समय-सीमा आगे बढ़ानी पड़ेगी।

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