रांची , सितंबर 21 -- झारखंड में कोयले की चोरी, अवैध खनन और अवैध ढुलाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने निगरानी और कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की रणनीति तैयार की है।

कोयला क्षेत्रों में 'जीरो कोल लीकेज' नीति के तहत अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने पर जोर दिया जा रहा है। अभियान के तहत अवैध खनन से लेकर कोयला चोरी और उसकी अवैध ढुलाई तक की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील इलाकों, जंगलों और संभावित अवैध खनन स्थलों की निगरानी में प्रशिक्षित स्वान दस्ते की भी मदद ली जाएगी।

सीआईएसएफ अब केवल कोयला परियोजनाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खनिज संपदा की चोरी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाएगा। इस दौरान खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर रहेगा।

कोयला खदानों से निकलने वाले कोयले की आवाजाही और संभावित अवैध डायवर्जन पर निगरानी मजबूत की जाएगी। चोरी और अवैध खनन से जुड़े मामलों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के माध्यम से कार्रवाई में तेजी लाने की योजना है।

निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से भी मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत ड्रोन सर्विलांस, वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग और डेटा एनालिसिस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

सीआईएसएफ अधिकारियों के अनुसार, कोयला चोरी में इस्तेमाल होने वाले रास्तों और संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन ने रांची में हुई समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कोयला चोरी रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए थे।

झारखंड की मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाएं इस रणनीति के प्रमुख केंद्रों में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं में कोयले की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की तैनाती और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। आम्रपाली परियोजना में शुरुआत में करीब 200 सीआईएसएफ जवानों की तैनाती की गई है, जिसे आगे बढ़ाकर करीब 1,700 जवानों तक किए जाने की योजना बताई गई है।

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