गिरिडीह , सितम्बर 03 -- झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाओं को नई दिशा देने और पर्यटन परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से कर्नाटक सरकार के साथ महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक संवाद हुआ है।
श्री कुमार ने कहा कि इस संवाद के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन, विकास और नए अवसरों को लेकर अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।
झारखंड सरकार के अध्ययन दल के साथ कर्नाटक प्रवास के दौरान कर्नाटक सरकार के वन मंत्री ईश्वर खांड्रे एवं पर्यटन मंत्री के. जे. जॉर्ज से मुलाकात कर पर्यटन एवं वन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में कर्नाटक सरकार के पर्यटन सचिव, जंगल लॉज एंड रिसॉर्ट्स के एमडी एवं ईडी तथा कर्नाटक स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस दौरान कर्नाटक सरकार की प्रतिष्ठित संस्था जंगल लॉज और रिसॉर्ट्स (जेएलआर) द्वारा वन एवं पर्यटन क्षेत्रों में स्थित विभिन्न पर्यटन परिसंपत्तियों के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया। विशेष रूप से संस्थान के मैनेजमेंट मॉडल, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रोक्योरमेंट व्यवस्था, संचालन प्रणाली तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की प्रक्रिया को समझा गया।
बैठक में जंगल लॉज और रिसॉर्ट्स (जेएलआर) को झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्थित पर्यटन परिसंपत्तियों एवं रिसॉर्ट्स के बेहतर संचालन और प्रबंधन के लिए नॉलेज पार्टनर के रूप में जोड़ने की संभावनाओं पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस दिशा में संभावित एमओयू तथा दोनों राज्यों के सहयोग से आगे की कार्ययोजना तैयार करने पर सकारात्मक चर्चा हुई।
श्री खांड्रे के साथ बैठक में झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर चुनौती पर भी विशेष चर्चा हुई। इस समस्या से निपटने के लिए झारखंड सरकार द्वारा पूर्व में कर्नाटक सरकार से 6 प्रशिक्षित कुमकी हाथियों की मांग की गई थी। इस विषय पर कर्नाटक सरकार की ओर से सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हुई है। अब दोनों राज्य सरकारें आपसी समन्वय से आगे की कार्ययोजना तैयार करेंगी।
यह अध्ययन भ्रमण देश के सफल मॉडलों से सीखकर उन्हें झारखंड की परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
हमारा प्रयास है कि झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन हो, पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और राज्य में टिकाऊ एवं जिम्मेदार पर्यटन को नई गति मिले।
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