हजारीबाग , सितंबर 03 -- झारखंड के हजारीबाग जिले केकेरेडारी के पांडु गांव में बीजीआर कंपनी द्वारा संचालित कोयला खदान की ब्लास्टिंग ने ग्रामीणों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

स्थल पर पहुंचकर की गई ग्राउंड रिपोर्ट में ग्रामीणों ने बताया कि ब्लास्टिंग का कंपन केवल खदान के आसपास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गांव में महसूस किया जाता है। कई मकानों की दीवारों में पड़ी दरारें भी स्पष्ट दिखाई देती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब खदान में ब्लास्टिंग होती है तो तेज धमाके के साथ पूरा गांव कंपन महसूस करता है। घरों की दीवारें हिलती हैं और लोग अनहोनी की आशंका से सहम जाते हैं। कई परिवारों का कहना है कि ब्लास्टिंग के समय वे घर के अंदर रहने के बजाय बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं।

गांव में भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने उन मकानों की दीवारें दिखाईं, जिनमें दरारें होने का दावा किया गया। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें आंखों से साफ दिखाई देती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार होने वाली ब्लास्टिंग और कंपन के कारण उनके मकानों की स्थिति खराब होती जा रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने कई बार बीजीआर कंपनी के प्रबंधन को इस समस्या की जानकारी दी, लेकिन शिकायतों के बावजूद उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लास्टिंग के कारण सिर्फ मकानों को नुकसान का डर नहीं है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

डीसी के निर्देश के बाद भी महीनों से इंतजारकंपनी प्रबंधन से शिकायत के बाद जब ग्रामीणों को राहत नहीं मिली तो उन्होंने उपायुक्त को पत्राचार कर पूरे मामले की जानकारी दी। ग्रामीणों के अनुसार, उपायुक्त ने मामले में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।

लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि निर्देश के कई महीने बीत जाने के बावजूद अधिकारी गांव में जांच के लिए नहीं पहुंचे। ग्रामीण इसे प्रशासनिक उदासीनता मानते हैं और कहते हैं कि उन्हें बार-बार आश्वासन तो मिला, लेकिन समाधान नहीं।

पांडु गांव में करीब 200 घरों की बस्ती होने की बात ग्रामीणों ने बताई। ग्रामीणों का सवाल है कि जब ब्लास्टिंग का कंपन पूरे गांव में महसूस होता है और कई मकानों की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, तो विस्थापन के लिए करीब 50 घरों को ही क्यों चिह्नित किया गया है?ग्रामीणों की मांग है कि पूरे गांव का निष्पक्ष एवं तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए। ब्लास्टिंग से प्रभावित प्रत्येक मकान की स्थिति का आकलन हो और जो परिवार वास्तव में प्रभावित हैं, उन्हें उचित मुआवजा एवं पुनर्वास का लाभ देकर सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।

"विकास चाहिए, लेकिन घरों की कीमत पर नहीं"ग्रामीणों का कहना है कि वे खनन या विकास के विरोधी नहीं हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि विकास के साथ उनकी जान-माल और घरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि खदान में होने वाली ब्लास्टिंग से लगातार कंपन महसूस हो रहा है और मकानों में दरारें दिखाई दे रही हैं, तो इसकी वैज्ञानिक और तकनीकी जांच कब होगी और प्रभावित परिवारों को स्थायी राहत कब मिलेगी।

डीसी ने कहा- सभी प्रभावित घरों को चिह्नित कर किया जाएगा विस्थापित इस मामले में हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी घरों को चिह्नित कर विस्थापित किया जाएगा। डीसी के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि लंबे समय से चली आ रही उनकी समस्या का अब स्थायी समाधान निकलेगा।

पांडु गांव में अब सवाल सिर्फ दीवारों में आई दरारों का नहीं है, बल्कि उन दरारों के बीच रह रहे परिवारों के भविष्य और सुरक्षा का भी है।

ग्रामीण प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण, वैज्ञानिक जांच और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। वहीं, उपायुक्त के आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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