रांची , मई 20 -- झारखंड में उच्च शिक्षा विभाग के थोपे गए अव्यावहारिक "क्लस्टर सिस्टम" के विरोध में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के आह्वान पर पूरे राज्य में छात्र सड़कों पर उतरे।
रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हज़ारीबाग, पलामू, साहिबगंज, गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा, सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, गढ़वा, चतरा सहित सभी 27 संगठनात्मक जिलों के प्रत्येक महाविद्यालय में स्थानीय इकाइयों के नेतृत्व में छात्रों ने उच्च शिक्षा विभाग और झारखंड सरकार का पुतला दहन किया। एबीवीपी की केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य कु. दिशा दित्या ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाई गई ये नीतियाँ झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
परिषद मांग करती है कि किसी भी नीति को लागू करने से पहले उच्च शिक्षा विभाग अपनी क्षमता का आकलन करे और राज्य के ग्रामीण व आर्थिक रूप से वंचित छात्र-छात्राओं के हितों को सर्वोपरि रखकर ही निर्णय ले। बिना धरातलीय विश्लेषण के लिए गए फैसले केवल छात्रों के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रहे हैं।"एबीवीपी झारखंड प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि "क्लस्टर सिस्टम के नाम पर सरकार शिक्षा की रीढ़ तोड़ रही है। रांची से लेकर सुदूर ग्रामीण जिलों तक - चाहे वह साहिबगंज हो, पलामू हो या सिमडेगा - सभी 27 संगठनात्मक जिलों में छात्रों का जो आक्रोश फूटा है, वह सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है। यदि यह अव्यावहारिक क्लस्टर प्रणाली अविलंब वापस नहीं ली गई, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद चुप नहीं बैठेगी। आने वाले दिनों में परिषद और भी बड़े स्तर पर प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी, जिसमें राजधानी रांची में राजभवन और मुख्यमंत्री आवास का घेराव भी शामिल है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।"प्रदर्शनकारी छात्रों का मतप्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में कहा कि क्लस्टर सिस्टम के लागू होने से छात्रों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, और जब तक यह जन-विरोधी निर्णय वापस नहीं लिया जाता, यह संघर्ष और अधिक तीव्र रूप लेगा।
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