लातेहार , जून 15 -- झारखंड के लातेहार जिले के टोरी रेलवे क्रासिंग का जाम यातायात की समस्या के साथ यह हजारों लोगों के लिए रोजाना की पीड़ा, बेबसी और मौत के भय का प्रतीक बन चुका है।

वर्षों से ओवरब्रिज निर्माण का इंतजार कर रहे लोगों का धैर्य सोमवार को तब टूटता नजर आया जब किसान सभा और माकपा के बैनर तले सैकड़ों किसान, महिलाएं और ग्रामीण चिलचिलाती धूप में चार किलोमीटर पैदल चलकर समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त को सामूहिक ज्ञापन सौंपते हुए इच्छा मृत्यु की अनुमति मांग ली।उदयपुरा से शुरू हुई पदयात्रा समाहरणालय पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाल झंडे, बैनर और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की तस्वीरें थीं। पोस्टरों पर लिखा था कि तीन अप्रैल 2021 को बड़े तामझाम के साथ टोरी-चंदवा रेलवे ओवरब्रिज का शिलान्यास किया गया था, लेकिन पांच वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब शिलान्यास हो चुका है, बजट भी बढ़ चुका है और कई बार टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो आखिर निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो रहा।

माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि टोरी रेलवे क्रॉसिंग की समस्या अब पूरे पलामू प्रमंडल की समस्या बन चुकी है। यहां लगने वाले जाम में मरीज, छात्र, कर्मचारी और आम नागरिक घंटों फंसे रहते हैं। कई बार एंबुलेंस भी जाम में अटक जाती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि जनता को अपनी पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए इच्छा मृत्यु मांगनी पड़ रही है।

राज्य कमेटी सदस्य सह किसान नेता अयुब खान ने कहा कि टोरी फाटक लोगों के लिए अभिशाप बन गया है। अगर सरकार जाम से मुक्ति नहीं दे सकती तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे। जिला सचिव रसीद मियां ने कहा कि रेलवे फाटक की समस्या विकास, स्वास्थ्य और जनजीवन तीनों पर भारी पड़ रही है। इसके बाद पार्टी के शिष्टमंडल ने उपायुक्त संदीप कुमार को किसानों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि एनएच-99 (न्यू एनएच-22) पर प्रस्तावित टोरी-चंदवा रेलवे ओवरब्रिज का शिलान्यास तीन अप्रैल 2021 को हुआ था। सात बार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और परियोजना लागत बढ़कर लगभग 120 करोड़ रुपये तक पहुंचने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका है। किसानों ने इसे सरकारों और संबंधित विभागों की घोर उदासीनता बताया।

ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे फाटक पर लगने वाला जाम अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। कई बार मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ देते हैं। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानियां होती हैं। घंटों तक फाटक बंद रहने और लगातार ट्रेनों के परिचालन के कारण लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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