बोकारो , सितंबर 15 -- जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और बियाड़ा के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी ने आज कहा है कि झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत ठेका श्रमिकों को हर सरकारी सुविधा उपलब्ध अभिलंब कराए।

श्री चौधरी ने कहा कि ठेका श्रमिकों को वर्षों से शोषण किया जा रहा है। इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बीएसएल के मुख्य गेट पास अनुभाग द्वारा लगभग बीस हज़ार से बाईस हज़ार के क़रीब ठेका मज़दूरों के लिए अलग अलग दैनिक, मासिक या वार्षिक टेंडर अवधि के आरएफआईडी गेट पास बनाए या नवीनीकरण किए जाते हैं।उन्होंने कहा की ये ठेकेदार मज़दूर मेंटेनेंस ,सिविल वर्क,ट्रांसपोर्टेशन,ऑपरेशन सपोर्ट,जेवी प्रोजेक्ट्स बड़े प्रोजेक्ट्स एवं मॉडर्नाइजेशन टेंडर के तहत प्लांट के अंदर चल रहे नए कंस्ट्रक्शंस, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट या आधुनिक प्रोजेक्ट्स के साथ स्क्रैप हैंडलिंग, क्लीनिंग, हाउसकीपिंग, कैंटीन सर्विसेज लोजिस्टिक्स, लोडिंग अनलोडिंग इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग सिविल रिपेयर जैसे अन्य क्षेत्रों में प्रत्यक्ष तौर पर बोकारो स्टील प्लांट को अपना श्रम देते हैं जिससे बोकारो स्टील प्लांट निर्बाध गति से चलता है और स्टील उत्पादन करता है।

ज्ञातव्य है कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना बतौर एक सार्वजनिक प्रतिष्ठान के तौर पर हुई है ।उन्होंने कहा को बीस से बाईस हज़ार मजदूर जो प्रतिदिन अपना श्रम को देते हैं उनके गेट पास में बोकारो प्रक्षेत्र का ही पता मसलन उदाहरण के तौर पर दुंडीबाद झोपड़ पट्टी, लकड़ी गोला, माराफारी, बसंती मोड़, सेक्टर १ झोपड़ियों, झोपड़ी कॉलोनी, रानीपोखर, चौफान, रामडीह आदि अंकित रहता हैं। इन पते को बोकारो स्टील प्रबंधन अतिक्रमण क्षेत्र मानती है।

श्री चौधरी ने कहा कि ये प्रबंधन का दोहरा चरित्र है जो एक तरफ़ उनसे उनका श्रम लेकर उत्पादन करता है और प्लांट से बाहर आते ही उसे अतिक्रमणकारी कहकर संबोधित करता हैं और संपदा न्यायालय और एल आर ए के ज़रिए समय समय पर सार्वजनिक नोटिस जारी करता है।

बीएसएल प्रशासन समय समय पर इन इलाक़ों में सुरक्षा बल भेजकर नए निर्माण को तोड़ ता है और उन्हें अवैध निर्माण मानता है। उन्होंने कहा की "गेट पास वैद्य और घर अवैध "यह सरासर प्रबंधन की ग़लत नीतियों की ओर इंगित करती है।

श्री चौधरी ने कहा कि प्लांट में काम करने वाले हजारों ठेका मज़दूरों को प्लांट या ठेकेदार द्वार कोई आधिकारिक आवास नहीं मिलता। कम वेतन के कारण वे में किराए के घर नहीं ले सकते इसलिए मजबूरी में झोपड़ी और कच्चा मकान बनाकर जीवन यापन करता है। विस्थापित बस्ती के लोग जिनके पूर्वजों की ज़मीन प्लांट के लिए ली गई थी लेकिन उन्हें आज तक पुनर्वास या नियोजन नहीं मिला।

श्री चौधरी ने कहा की इस तीस से चालिस सालों से उन्हें अतिक्रमण कारी मान कर नीतियों बना रहे हैं और उस पर काम कर रहे है ।इससे इस शहर में भारी अव्यवस्था ,गंदगी और असुरक्षा का वातावरण का निर्माण हुआ है । इस नीति के फलाफल सिर्फ़ यही है की कुछ चंद लोग इससे लाभान्वित हुए होगे और हो रहे होंगे।

उन्होंने कहा कि बोकारो स्टील प्रबंधन अपनी नज़रिया में बदलाव लाए और नीतियां उन्हें अतिक्रमणकारी के बजाय सेवा प्रदाता के तौर पर देखें और उन्हें नागरिक सुविधा मुहैया कराने के लिए कार्य करें।

बोकारो स्टील प्रबंधन जिला प्रशासन , राजनीतिक दल,सामाजिक संगठन, मजदूर यूनियन के साथ बैठक कर हल करने के दिशा में समग्र योजना तैयार करे और वर्षों पुरानी समस्या से निजात दिलाए ।

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