रांची , जुलाई 03 -- झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड अंतर्गत सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की रहस्यमयी मौत के मामले में बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी टीम की जांच में यह साफ हो गया है कि परिवार की मौत किसी अज्ञात बीमारी से नहीं, बल्कि सरसों तेल में आर्गेमोन मेक्सिकाना यानी स्थानीय भाषा में कहे जाने वाले 'कटैला' या 'पीला धतूरा' के तेल की मिलावट के कारण हुई थी। रांची स्थित फूड टेस्टिंग लैबोरेट्री से आई जांच रिपोर्ट ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी की टीम ने पीड़ित परिवार के घर से खानपान की सामग्रियों के साथ-साथ उपयोग किए जा रहे सरसों तेल का सैंपल लिया था। रांची फूड लैब ने पलामू स्वास्थ्य विभाग को भेजी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सरसों तेल में आर्गेमोन मेक्सिकाना (पीला धतूरा) के तेल की मिलावट थी।
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरके रंजन, जिन्होंने सबसे पहले मरीजों का इलाज किया था। उसने बताया कि इस केस में शुरू से ही आशंका थी कि सरसों तेल में आर्गेमोन मैक्सिकाना मिला हुआ है। यह तेल इंसानों के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा होता है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल जानवरों के इलाज के लिए किया जाता है। मेरे पूरे करियर में यह दूसरा ऐसा मामला है, जहां तेल में मिलावट के कारण इस तरह की जानलेवा स्थिति देखी गई।"सिक्का गांव के इस पीड़ित परिवार में मौत का सिलसिला बीते 19 जून से शुरू हुआ था। सभी मृतकों के शरीर में मौत से पहले अत्यधिक सूजन की शिकायत देखी गई थी। सबसे पहले 19 जून को परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की सबसे पहले मौत हुई। 20 जून को कुलदीप महतो की बेटी बबिता कुमारी ने दम तोड़ा। 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी की इलाज के दौरान मौत हो गई। 28 जून को कुलदीप महतो की बहू श्वेता देवी की रांची रिम्स में मौत हुई। इसके बाद बेटे नकुल महतो ने भी रिम्स में ही दम तोड़ दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू पुलिस भी पूरी मुस्तैदी से जांच में जुटी है। पड़वा थाना प्रभारी अंकित कुमार ने बताया कि पुलिस को कुलदीप महतो और बबीता कुमारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं है, जिसके कारण मौत की सटीक कड़ियों को जोड़ने के लिए विसरा को जांच के लिए भेजा जा रहा है।
इसके साथ ही, रिम्स में भर्ती रही महिला के यूरिन और ब्लड सैंपल को भी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री) जांच के लिए भेजा गया है। विसरा और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में जहरीला तेल सरसों में कैसे मिला।
आर्गेमोन मेक्सिकाना (पीला धतूरा) एक कांटेदार खर-पतवार है जो पलामू और आसपास के इलाकों के खेतों व परती जमीनों पर बड़े पैमाने पर उगता है। इसके बीज हुबहू सरसों के दानों जैसे दिखते हैं। सरसों के साथ इसकी पेराई हो जाने पर तेल में 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी' नामक घातक बीमारी पैदा करने वाले तत्व मिल जाते हैं, जो सीधे इंसान के दिल, लीवर और शरीर के अंगों को फेल कर देते हैं।
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