रांची , अप्रैल 20 -- झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला से वर्ष 2018 में लापता बच्ची के मामले में सोमवार को सुनवाई हुई।
कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए कहा कि इस दौरान अनुसंधान का सार्थक परिणाम नहीं आया तो मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
इस मामले में झारखंड के डीजीपी ने कोर्ट में वर्चुअल रूप से हाजिर होकर अनुसंधान की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। कोर्ट ने उनसे कहा कि पुलिस का अनुसंधान किस प्रकार चल रहा है, 7 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी गुमला से लापता हुई बच्ची अब तक बरामद नहीं की जा सकी है।
इस अहम सुनवाई की जानकारी देते हुए झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने यूएनआई को बताया कि खंडपीठ ने मामले में अब तक की सुस्त जांच पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सितंबर 2018 से बच्ची लापता है लेकिन 7 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसे बरामद नहीं किया जा सका है, जो बेहद गंभीर स्थिति है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोषजनक जवाब दाखिल किया जाए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।
ज्ञातव्य है कि सितंबर 2018 से गुमशुदा गुमला की 6 वर्षीय बच्ची की बरामद करने को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन की ओर से दायर हेवियस कार्पस की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट कर रही है। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि इस मामले में गहरी अनुसंधान के लिए नया एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने दिल्ली जाकर उस अपहरण किए गए बच्ची की जानकारी लेने की कोशिश की. उसके फोटो को जगह-जगह अपलोड कराया है।
दुर्भाग्यवश अभी तक बच्ची बरामद नहीं हु है। बच्ची की तलाश जारी है। इसी मामले में वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की छापेमारी में लापता नौ बच्चे बरामद हुए थे।
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