दुमका, 07अक्टूबर (वार्ता) झारखंड आंदोलन के अग्रदूत शिबू सोरेन की धर्मपत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का आज बुधवार को निधन हो गया।
उनके निधन से संथाल परगना समेत पूरा राज्य में। शोक की लहर है। वह काफी समय से बीमार चल रही थीं। एक अस्पताल में इलाज के दौरान आज रात उन्होंने अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे एक पुत्री व दो पुत्र के साथ कई पोता,पोती,नाती नातिन सहित भरा परिवार छोड़कर गयी हैं। एक साल पूर्व अगस्त महीने में पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरू शिबू सोरेन के निधन के बाद उनकी पत्नी रुपी सोरेन किस्कू के निधन से झामुमो परिवार के साथ पूरी पार्टी को भारी क्षति हुई है।
जानकारी के अनुसार दिशोम गुरू शिबू सोरेन महज 18 साल के हुए थे तो परिवार के दबाब में वर्ष 1962 में रूपी किस्कू से परिणय बंधन में बंध गये। उस समय जमशेदपुर के चांडिल इलाके की रहनेवाली रूपी सोरेन किस्कू भी काफी उम्र की थीं। अपने पिता सोबरन सोरेन की निर्मम हत्या से आहत शिबू सोरेन महाजनी प्रथा से समाज को मुक्त कराने के लिये घर द्वार का त्याग कर जंगल पहाड़ का भ्रमण करने लगे। वहीं विवाह के बाद ग्रामीण परम्परा का निर्वहन करते हुए कम उम्र में भी रूपी सोरेन किस्कू संयुक्त परिवार में रहकर अपने घर- गृहस्थी की जिम्मेवारी संभालने लगी। इस बीच अक्सर घर परिवार से दूर रहने वाले शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के कंधे पर एक मात्र बड़ी पुत्री अंजली सोरेन और तीन पुत्र दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन के परवरिश की जिम्मेदारी मिल गयी । एक मां के रूप में रूपी सोरेन ने न केवल शिबू सोरेन के संघर्ष और आंदोलन की तपिश में पूरे परिवार को संभाला, बल्कि उन मासूम बच्चों में हक अधिकार के लिये संघर्ष के मजबूत संस्कार भी डाले। उन्हें यह शक्ति अपनी सास सोनामनि मुर्मू से विरासत में मिली ।
आज पूरी दुनिया रूपी सोरेन और शिबू सोरेन के पालन-पोषण और दिए गए संस्कारों को देखती रही इसी क्रम में अपने पति शिबू सोरेन 1996 के बाद कथित रूप से सांसद रिश्वत कांड की बजह से कानूनी संकट में फंसे तो उनकी पत्नी रूपी सोरेन किस्कू ने अपने बच्चों के साथ पार्टी में मोर्चा संभाला और कार्यकर्ताओं का हौसला बढाया। इसी क्रम में झामुमो ने 1999 में शिबू सोरेन की परम्परागत दुमका लोकसभा सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता और उस समय के केन्द्रीय मंत्री रहे बाबूलाल मरांड़ी के खिलाफ रूपी सोरेन किस्कू को मैदान में उतारा। इस चुनाव में बतौर केन्द्रीय मंत्री भाजपा के बाबूलाल मरांडी कांटे की टक्कर में महज 4648 मतों के अंतर से ही चुनाव जीत सके। इस बार भाजपा के बाबू लाल मरांडी को 2,01,141 मिले जबकि झामुमो की रुपी सोरेन किस्कू को 1,96,493 वोट मिले थे। संकट के दौर में भी रुपी सोरेन किस्कू ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नयी उर्जा भरने की कौशिश की। उनके बड़े पुत्र स्वर्गीय दुर्गा सोरेन दुमका के जामा से दो बार विधायक रहे। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन वर्ष 1995 और 2000 में जामा से विधायक रहे। उन्हें झामुमो का केंद्रीय महासचिव भी बनाया गया था। उनका जन्म वर्ष 1970 में और दूसरे पुत्र वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 1975 में और तीसरे पुत्र बसंत सोरेन का 1979 में जन्म हुआ। वहीं उनकी बड़ी बेटी अंजनी सोरेन की शादी ओडिशा में हुई है।
अंजनी भी झामुमो की राजनीति में सक्रिय हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में, उन्होंने ओडिशा की मयूरभंज सीट से भाजपा के नव चरण मांझी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इससे पहले वर्ष 2024 में, उन्होंने ओडिशा के सरसकाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन गांडेय से विधायक हैं। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2014 से बरहेट से और बसंत सोरेन 2019 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। जबकि उनकी बड़ी पुत्र बधू सीतो सोरेन जामा से तीन बार विधायक चुनी जाती रहीं। हालांकि 2024 में सीता सोरेन झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हो गयी। वहीं दूसरी पुत्र बधू कल्पना सोरेन गांडेय से विधायक हैं। राजनीति में बहुत अधिक सक्रिय नही रहने के बावजूद रूपी सोरेन सार्वजनिक जीवन में परिवार व पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं को स्नेह प्यार देती रहीं। उनके निधन से झारखंड के इतिहास का एक उथल-पुथल भरा अध्याय समाप्त हो गया है।
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