रांची , फरवरी 27 -- झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के साइंस बिल्डिंग स्थित ऑडिटोरियम में "गणित एवं सांख्यिकी में नवीनतम विकास" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य और गरिमामय शुभारंभ हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुए इस आयोजन ने परिसर को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की ऊर्जस्विता से आलोकित कर दिया। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए विद्वानों, प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय आयाम प्रदान किया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलपति प्रो. सुरेश कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग की वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में डेटा को समझने, विश्लेषित करने और सार्थक निष्कर्ष तक पहुँचने में गणित एवं सांख्यिकी की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान की गुणवत्ता, मौलिकता और सामाजिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी।

प्रो. सारंग मेढेकर ने अपने वक्तव्य में कहा कि गणित समस्त विज्ञानों की आधारभूत भाषा है। भौतिकी, इंजीनियरिंग, जैविक विज्ञान, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान-सभी क्षेत्रों में गणितीय चिंतन और विश्लेषण की अनिवार्य भूमिका है। उन्होंने अंतःविषय शोध को समय की आवश्यकता बताते हुए सहयोगात्मक प्रयासों पर बल दिया।

के. वी पंडा ने विभाग की उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए बताया कि गणित विभाग विश्वविद्यालय की स्थापना से ही सक्रिय है, जबकि सांख्यिकी विभाग की स्थापना वर्ष 2022 में की गई, जिसने अल्प समय में उल्लेखनीय प्रगति की है। पी के परिदा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया।

प्राकृतिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एम. के. सिंह ने संचार तंत्र, जल एवं ठोस अवस्था से संबंधित वैज्ञानिक अवधारणाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जटिल प्रक्रियाओं को समझने और उनका पूर्वानुमान लगाने में गणितीय मॉडलिंग अत्यंत प्रभावी है।

सम्मेलन के प्रथम दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में मशीन लर्निंग, उन्नत सांख्यिकीय विधियों और मापन डेटा विश्लेषण पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। विशेष रूप से चिकित्सा एवं जैविक विज्ञान में गणितीय और सांख्यिकीय तकनीकों के अनुप्रयोग पर गहन चर्चा हुई। शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर नए विचारों और नवाचारों को साझा किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋषिकेश महतो ने सुव्यवस्थित रूप से किया तथा अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान-विमर्श और शोध-संवाद का एक सशक्त मंच बनकर उभरा है, जो विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भविष्य की नई दिशाओं की ओर अग्रसर कर रहा है।

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