पंचकूला , अगस्त 08 -- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन अधिक वजन और मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, हृदय संबंधी बीमारियों और मानसिक विकारों के अधिक जोखिम से जुड़ा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोकसभा में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उपलब्ध वैश्विक वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित आकलन का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है।

सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य मुख्य रूप से अवलोकन आधारित हैं और अपने आप में कारण और परिणाम का संबंध स्थापित नहीं करते। आईसीएमआर ने यह पता लगाने के लिए भी कोई विशेष अध्ययन नहीं किया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में तंबाकू उत्पादों और अन्य आदत डालने वाले पदार्थों जैसी लत पैदा करने वाली व्यवहारगत विशेषताएं हैं या नहीं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सात अगस्त को सांसद वी. वैथिलिंगम के लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 3421 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का प्रभाव' के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने कहा कि इन स्वास्थ्य स्थितियों के पीछे कई कारण होते हैं और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कई परिवर्तनीय जोखिम कारकों में से एक माना जाता है।

सरकार के मुताबिक, भारतीयों के लिए आहार दिशानिर्देश, 2024 में मुक्त चीनी का सेवन सीमित करने, चीनी मिले पेय पदार्थों का बार-बार सेवन नहीं करने और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन न्यूनतम रखने की सिफारिश की गई है।

दिशानिर्देशों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की पहचान करने और खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ने के बारे में भी विशेष मार्गदर्शन दिया गया है, ताकि उपभोक्ता जानकारी के आधार पर अपने भोजन का चुनाव कर सकें।

आईसीएमआर ने शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की 'शुगर बोर्ड्स' पहल के लिए मॉडल बोर्ड विकसित करने में भी योगदान दिया है।

इसके अलावा आईसीएमआर ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से बच्चों और किशोरों के लिए खाद्य वातावरण बेहतर बनाने के उद्देश्य से 'लेट्स फिक्स आवर फूड' पहल शुरू की है।

इसका उद्देश्य स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण को बढ़ावा देना तथा अधिक चीनी, वसा और नमक वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को हतोत्साहित करना है। इसमें स्कूलों, अभिभावकों, युवाओं, नीति निर्माताओं और नागरिक समाज को भी जोड़ा जा रहा है।

आईसीएमआर सार्वजनिक व्याख्यान, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, राष्ट्रीय पोषण माह और अन्य स्वास्थ्य अभियानों के जरिए भी पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ा रहा है। क्षेत्रीय भाषाओं में पोषण शिक्षा सामग्री भी विकसित की जा रही है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सरकार को बताया है कि उसका 'ईट राइट इंडिया' अभियान ईट सेफ, ईट हेल्दी और ईट सस्टेनेबल के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। 'आज से थोड़ा कम' अभियान के तहत लोगों को खानपान में बदलाव कर धीरे-धीरे वसा, नमक और चीनी का सेवन घटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 'स्टॉप ओबेसिटी' और 'फाइट ओबेसिटी' अभियानों के जरिए सोशल मीडिया पर मोटापे से संबंधित जागरूकता सामग्री भी साझा की जा रही है।

अप्रैल 2025 में माईगव के सहयोग से 'ईट राइट क्विज ऑन ओबेसिटी' भी शुरू किया गया था।

एफएसएसएआई का '#हरलेबलकुछकहताहै' जागरूकता अभियान उपभोक्ताओं को खाद्य लेबल समझने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत लोगों को कैलोरी, वसा, चीनी, प्रोटीन, परोसने की मात्रा, सामग्री की सूची, एलर्जी संबंधी चेतावनी और तारीख जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पढ़ने के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

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