अमृतसर , फरवरी 19 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने गुरुवार को श्री हरमंदिर साहिबके मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह द्वारा गुरुद्वारों की जमीनें बेचने और एसजीपीसी में भ्रष्टाचार के लगाये गये आरोपों के संबंध में उन्हें 72 घंटों के भीतर अपने आरोपों को सिद्ध करने के लिए नोटिस जारी किया है। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को भी एसजीपीसी पर आरोपलगाने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए कहा है।

एसजीपीसी की अंतरिम समिति की बैठक में एडवोकेट धामी ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह पर लगाये गये आरोप, जिसमें गुरुद्वारा अंब साहिब मोहाली की जीएमएडीए द्वारा योजना के तहत ली गयी भूमि और गुरुद्वारा श्री भट्टा साहिब रोपड़ की भूमि का मामला शामिल है, पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा श्री भट्टा साहिब से संबंधित भूमि की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की गयी है और इसी प्रकार गुरुद्वारा श्री अंब साहिब मोहाली की जीएमएडीए द्वारा ली गयी भूमि की मात्रा भी नियमों के अनुसार है। इस संबंध में निराधार आरोप लगाकर एसजीपीसी प्रशासन को बदनाम करना और संगत को गुमराह करना उचित नहीं है। इसलिए, यदि ज्ञानी हरप्रीत सिंह सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो गुरुद्वारा साहिब प्रबंधन उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेगा।

एडवोकेट धामी ने कल जालंधर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में कहा कि जांच समिति ने गंभीर निर्णय लेते हुए 72 घंटों के भीतर आरोपों को साबित करने के लिए नोटिस जारी किया है। उन्होने कहा कि ज्ञानी रघुबीर सिंह, जो वर्तमान में अवकाश पर हैं, ने एक सम्मानित पद पर रहते हुए बिना किसी ठोस सबूत के संस्था पर आरोप लगाकर संस्था को बदनाम किया है। इसलिए, उन्हें 72 घंटों के भीतर आरोपों के संबंध में सबूत पेश करने होंगे। यदि वे निर्धारित समय के भीतर लिखित में सबूत पेश नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

एडवोकेट धामी ने बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए गुरुद्वारा श्री अंब साहिब के प्रबंधक द्वारा जमीन की धोखाधड़ी से बिक्री के संबंध में कहा कि जांच जारी है और इसमें शामिल किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद हर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को चेतावनी या जुर्माने में हुई किसी भी गलती के लिए माफ नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में एक सिख पर हुए हमले की भी निंदा की और भारत सरकार से ऐसे मामलों में संबंधित देशों से राजनयिक स्तर पर बातचीत करने का आग्रह किया।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा प्रोफेसर देवेंद्रपाल सिंह भुल्लर की रिहाई की अपील को हाल ही में खारिज करना खेदजनक है। उन्होंने कहा कि पहले आम आदमी पार्टी की सरकार ऐसा करती रही और अब भाजपा सरकार भी सिख विरोधी रुख अपना रही है। उन्होंने इस मामले पर भाजपा के सिख नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा के सिख नेताओं का दोहरा रवैया उजागर हो गया है। उन्होंने सजा पूरी कर चुके बलवंत सिंह राजोआना और अन्य जेल में बंद सिखों को केंद्र सरकार द्वारा रिहा न किए जाने को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।

उन्होंने कहा कि सरकारों को जेल में बंद सिखों के साथ अजनबी जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए और सजा पूरी कर चुके हर सिख कैदी को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। अंतरिम समिति ने एआई तकनीक के इस्तेमाल से हो रही सिख विरोधी गतिविधियों का भी संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि समिति इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके धर्मों के विरुद्ध कार्य करने वालों को रोकने के लिए सचेत रूप से काम कर रही है। इस संबंध में एक समिति गठित करने के अलावा, शिरोमणि समिति विधि विभाग के माध्यम से भी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में, शिरोमणि समिति सिख सिद्धांतों, इतिहास और स्रोतों आदि से संबंधित अपना डेटा बैंक तैयार करेगी, ताकि लोगों को सटीक जानकारी मिल सके। इसके साथ ही, एआई कंपनियों से भी संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही एक जन रिपोर्टिंग सॉफ्टवेयर भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा, जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

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