वाराणसी , जुलाई 13 -- ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद में उच्चतम न्यायालय द्वारा मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान तलाशने की पहल पर हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

मामले से जुड़े अधिवक्ताओं के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों को 14 जुलाई को वाराणसी के जिला न्यायालय स्थित मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होकर बातचीत के माध्यम से विवाद के समाधान का प्रयास करने को कहा है। इसके तहत विशेष लोक अदालत के माध्यम से भी समाधान की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सचिव मोहम्मद यासीन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से इस विवाद का निस्तारण नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि देश में लाखों मामले लंबित हैं और ज्ञानवापी प्रकरण भी उनमें से एक है। उनका कहना है कि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता की प्रक्रिया में शामिल नहीं होगा।

वहीं, हिंदू पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होकर विवाद के समाधान का प्रयास करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष का स्पष्ट मत है कि ज्ञानवापी परिसर मंदिर का स्थान है और मुस्लिम पक्ष को वहां से अपना कब्जा छोड़ देना चाहिए, जिससे मूल ज्योतिर्लिंग स्थल पर भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।

उन्होंने दावा किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट में मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं तथा परिसर की दीवारों पर हिंदू प्रतीक चिह्न और देवी-देवताओं से जुड़े अवशेष पाए गए हैं।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी मध्यस्थता की पहल पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि समिति इसे प्रभावी समाधान नहीं मानती। उनका कहना था कि अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि विवाद में भी मध्यस्थता पैनल गठित किया गया था, लेकिन उससे समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक रूप से मंदिरों और मठों पर हुए कब्जों को वापस किए जाने के मुद्दे पर सहमति बनने की संभावना नहीं है। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद से संबंधित विभिन्न वाद वर्तमान में न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

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