रामपुर , जुलाई 27 -- उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान द्वारा स्थापित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के भविष्य पर मंगलवार को अहम फैसला आने की संभावना है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश के विरुद्ध दायर अपील पर 28 जुलाई को मुरादाबाद मंडलायुक्त न्यायालय में सुनवाई होगी। इस बीच विश्वविद्यालय के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के विरोध में विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार कर उसे निरस्त करने की मांग की है। वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं और विश्वविद्यालय प्रबंधन ने भी कार्रवाई का विरोध किया है।

आजम खान की पत्नी एवं विश्वविद्यालय से जुड़ी डॉ. तजीन फातिमा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मीडिया उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह नहीं कहा कि अखिलेश यादव प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, बल्कि उनका आशय यह था कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय आने का आश्वासन दिया है और वह छात्र हित में यहां आएंगे।

उन्होंने कहा कि समाजवादी आंदोलन और जौहर विश्वविद्यालय का पुराना संबंध है तथा पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इसकी आधारशिला रखी थी। उन्होंने विश्वास जताया कि फैसला विश्वविद्यालय के पक्ष में आएगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खुला है।

डॉ. तजीन फातिमा ने कहा कि विश्वविद्यालय को टेकओवर करना इतना आसान नहीं है। उनका दावा था कि संविधान के तहत अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान संचालित करने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने की नीयत से लगातार कार्रवाई की जा रही है और सरकार की नीतियों के कारण छात्रों में एकजुटता बढ़ी है।

समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी आसिम राजा ने भी विश्वविद्यालय के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि आयकर विभाग तथा अन्य एजेंसियों की कार्रवाई निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ध्वस्तीकरण के विरोध की आड़ में विश्वविद्यालय को सरकारी नियंत्रण में लेने की बात कर रहे हैं, जो एक सोची-समझी साजिश है।

उल्लेखनीय है कि रामपुर विकास प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण का हवाला देते हुए जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। इसके विरुद्ध विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुरादाबाद मंडलायुक्त न्यायालय में अपील दायर की है, जिस पर मंगलवार 28 जुलाई को सुनवाई होनी है। इस सुनवाई के निर्णय पर विश्वविद्यालय के भविष्य की दिशा काफी हद तक निर्भर मानी जा रही है।

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