जयपुर , जून 22 -- राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सोमवार को बताया कि जोधपुर के राजकीय जिला अस्पताल पावटा में भर्ती छह प्रसूताओं का स्वास्थ्य सामान्य और स्थिर है और चिकित्सकों की निगरानी में है।
श्री खींवसर ने बताया कि एमडीएम जोधपुर में भर्ती हाई डायबिटीज एवं ब्लड प्रेशर प्रसूता को और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जोधपुर एम्स में रेफर किया गया है, जबकि पीलिया ग्रसित एक अन्य प्रसूता का उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आठ प्रसूताएं विभिन्न जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों के साथ पावटा राजकीय जिला अस्पताल में पहुंची थी। उन्होंने कहा कि जोधपुर के प्रकरण को बीकानेर और कोटा के प्रकरणों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। राज्य के सरकारी अस्पतालों पर आमजन का विश्वास है और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि राजकीय अस्पतालों में प्रसव की सफलता दर 99.99 प्रतिशत है।
श्री खींवसर ने बताया कि सभी मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है तथा मामले की गहन चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला लापरवाही से संबंधित नहीं पाया गया है लेकिन फिर भी किसी भी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार कार्मिकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाये हुए है और मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि किसी भी सरकारी अस्पताल में कोई घटना होने पर राज्य सरकार प्रत्येक मामलों को बेहद गंभीरता से लेती है और पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और निष्पक्षता के साथ मामले की गहन जांच पड़ताल करती है तथा दोषी पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जाती है। अभी हाल में कोटा में प्रसूताओं से संबंधित प्रकरण में लापरवाही बरतने पर यूटीबी पर लगे चिकित्सक को हटाया गया, दो चिकित्सकों एवं दो नर्सिंग अधिकारियों को निलम्बित किया गया और अस्पताल अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किये गये। संबंधित फार्मा कंपनी के ड्रग्स के कंटेंट मानक अनुरूप नहीं होने के कारण कंपनी पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है और लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दिये गये सुझाव के आधार पर सभी राजकीय चिकित्सालयों के प्रभारियों को एसओपी की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश पूर्व में ही दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण मरीज दूसरे अस्पतालों से राजकीय चिकित्सालयों में पहुंचता है तब गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन हमारे राजकीय चिकित्सकों द्वारा अधिकांश मामलों में मरीजों को बेहतर उपचार देकर स्वस्थ किया जाता है।
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