जयपुर , अप्रैल 01 -- राजस्थान में जयपुर की एक अदालत ने जालौर जिले के सरवाना थाना क्षेत्र में जोधपुर डिस्कॉम की कथित लापरवाही से हुई पति-पत्नी और गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में आश्रितों को ढाई लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिये हैं।

न्यायाधीश पवन कुमार अग्रवाल ने गर्भस्थ शिशु को भी पीड़ित मानते हुए आश्रितों को ढाई लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश देने के साथ ही मृत किसान धुड़ाराम और उनकी पत्नी चुकी देवी के दावे भी स्वीकार किये गये हैं।यह हादसा 18 जुलाई 2021 की रात हुआ था, जब 11 किलोवाट का बिजली तार टूटकर एलटी लाइन पर गिर गया। इससे झोपड़ी में आग लग गयी और करंट की चपेट में आने से दंपती एवं गर्भस्थ शिशु की मौके पर ही मौत हो गयी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि धुड़ाराम, उनकी पत्नी और 28-30 सप्ताह के भ्रूण की मौत करंट लगने से हुई थी।

इस मामले में धुड़ाराम की मां धर्मी देवी, पिता रूगाराम और उनके दो वर्षीय पुत्र की ओर से कुल तीन याचिकाएं दायर की गयी थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता बसन्त सैनी ने पैरवी की।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि विद्युत विभाग बिजली लाइनों की देखरेख और रखरखाव से जुड़ा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका, जिसे अदालत ने गंभीर लापरवाही माना।

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