पटना, जुलाई 27 -- बिहार हेली पर्यटन एवं और एयर पर्यटन योजना 2026 के तहत पटना जॉय राइड के माध्यम से राज्य में हेली-टूरिज्म की यह ऐतिहासिक शुरुआत की गई है। इस विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बिहार फ्लाइंग इंस्टीट्यूट, पटना, जहां आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से बिहार के युवाओं को पायलट बनने का अवसर मिल रहा है।
पटना जॉय राइड से राज्य में हेली-टूरिज्म की नई पहल को गति मिल रही है। इस पहल के चलते न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है बल्कि पायलट और संबंधित हवाई-सेवा पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026' के तहत 'पटना जॉय राइड' सेवा की शुरुआत की, उसी दिन बिहार फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के नए अत्याधुनिक हैंगर का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर संस्थान से सफलतापूर्वक कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले चार प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र और एपॉलेट प्रदान किए गए।
वर्ष 1940 में बिहार फ्लाइंग क्लब के रूप में स्थापित बिहार फ्लाइंग इंस्टीट्यूट पूर्वी भारत के सबसे पुराने विमानन प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। पिछले आठ दशकों में यहां से प्रशिक्षित कई पायलट देश-विदेश की एयरलाइनों और विमानन संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वर्तमान में संस्थान में 24 प्रशिक्षु प्राइवेट पायलट लाइसेंस तथा 28 प्रशिक्षु कमर्शियल पायलट लाइसेंस के प्रशिक्षण में हैं। प्रशिक्षण के लिए संस्थान के पास चार आधुनिक सेसना 172आर प्रशिक्षण विमान उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से डीजीसीए के मानकों के अनुरूप उड़ान प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पाठ्यक्रम में ग्राउंड स्कूल की सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक उड़ान संचालन, एयर नेविगेशन, विमान प्रणाली की जानकारी, विमान नियमावली और मौसम विज्ञान शामिल हैं। इन सभी आवश्यक प्रशिक्षण घटकों को डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षु सुरक्षित और प्रमाणित पायलट बन सकें।
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