जैसलमेर , अप्रैल 18 -- राजस्थान में जैसलमेर में जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने जैसलमेर जिले के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के लिए ओरण भूमि के आरक्षण के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

राज्य सरकार द्वारा ओरण संरक्षण के लिए बड़ी पहल करते हुए जैसलमेर जिले के विभिन्न गांवों में ओरण के लिए कुल 22 हजार 648.12 बीघा भूमि आरक्षित की गई है।

सुश्री जोरवाल ने शनिवार को कहा कि ओरण गौचर पर्यावरण को लेकर हम सभी को ज़िम्मेदार होकर कार्य करना पड़ेगा, बात जहां ओरण भूमि और ग्रामीणों जरूरत होती हैं उसे भी ध्यान में रखना है साथ ही विकास को देख कर चलना है। उन्होंने कहा कि जैसलमेर पर्यटक नगरी के नाम से जाना जाता हैं उसे बढ़ावा देना चाहिए। जो भी करना है नियमों में रहते हुए करना है, नियमों अनुसार सभी लोगों की सहमति अनुसार कार्य करेंगे।

जोरवाल ने बताया कि असल में ओरण प्राचीन काल से चली आ रही एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं के कारण स्थानीय लोग इन पवित्र उपवनों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन क्षेत्रों में पेड़ों को काटना या कुल्हाड़ी का उपयोग करना वर्जित है, जिससे यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र स्वतः ही सुरक्षित रहता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित