रांची , अक्टूबर 17 -- शारदीय नवरात्र की महासप्तमी पर शुक्रवार को रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (जैप-1) परिसर में ऐतिहासिक फूलपाती शोभायात्रा निकाली गई।

करीब 146 साल पुरानी इस परंपरा में गोरखा जवानों के परिवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला, पुरुष और बच्चे लोकगीतों की धुन पर नाचते-गाते शोभायात्रा में शामिल हुए। इस दौरान गोरखा समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली।

जैप-1 परिसर स्थित दुर्गा मंदिर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर उत्साह का माहौल रहा। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद परंपरा के अनुसार गोरखा जवानों ने फायरिंग कर मां दुर्गा को सैन्य सलामी दी। आयोजन में शक्ति पूजा के साथ जवानों के अनुशासन और सैन्य परंपरा का भी प्रदर्शन हुआ।

जैप-1 परिसर में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1880 में हुई थी। तब से यहां गोरखा समुदाय की परंपरा के अनुसार महासप्तमी पर फूलपाती शोभायात्रा निकाली जाती है। इस आयोजन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। फूलपाती के दौरान नौ प्रकार की पवित्र वनस्पतियों की पूजा की जाती है। इनमें केला, गन्ना, बेलपत्र और हल्दी सहित अन्य पौधों की पत्तियां और टहनियां शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन्हें देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद फूलपाती को मंदिर के पूजा स्थल तक लाया जाता है।

जैप-1 परिसर की दुर्गा पूजा की खास विशेषता यह है कि यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने के बजाय कलश को देवी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

गोरखा समुदाय में मां दुर्गा को शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है। जवान अपने परिवार और देश की रक्षा की कामना करते हैं। इस परंपरा में शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व है।

फूलपाती शोभायात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गोरखा समुदाय के लोगों के एकजुट होने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है। हर साल महासप्तमी पर आयोजित होने वाली यह परंपरा रांची की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

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