जयपुर , मार्च 01 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए आध्यात्मिक चेतना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इस दिशा में जैन समुदाय की 'ध्यान, तपस्या एवं आत्मचिंतन की परंपरा' ने पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया है।

श्री शर्मा रविवार को जयपुर में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीटो) टाउन रिप्रजेन्टेटिव नेशनल कॉन्क्लेव एवं विश्व नवकार महामंत्र दिवस 2.0 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और इसमें जैन समाज सहित सभी समाजों की साझेदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि 'मूल्य आधारित नेतृत्व, सामाजिक एकता एवं आध्यात्मिक चेतना' भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। हमें अपने निर्णयों में ईमानदारी, पारदर्शिता, जनसेवा एवं नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके साथ ही एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील होकर कर्तव्यबोध को सर्वोपरि रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन समाज ने सदियों से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति को आगे बढ़ाया है। अहिंसा, करुणा एवं सत्य के मूल्यों के आधार पर भारतीय सभ्यता के निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी की अहिंसा की शिक्षा और प्राचीन काल से चली आ रही ज्ञान परंपरा के माध्यम से जैन दर्शन ने 'जियो और जीने दो' का अमर संदेश दिया है।

श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। वर्ष 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में 11वें स्थान पर थी, जो आज चौथे स्थान पर पहुंच गई है और शीघ्र ही तीसरे स्थान हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि जैन समाज का देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके साथ ही, सामाजिक क्षेत्र में भी समाज ने अनुकरणीय कार्य किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवकार महामंत्र दिवस 2.0 का आज शुभ कार्यक्रम है। नवकार महामंत्र केवल जैन धर्म का मंत्र नहीं है बल्कि यह समस्त मानवता को अहिंसा, करुणा, ज्ञान एवं आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाने वाला सार्वभौमिक संदेश है। उन्होंने नवकार महामंत्र की दिव्य ऊर्जा से विश्व में शांति, सद्भाव एवं कल्याण का मार्ग प्रशस्त होने की मंगलकामना की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने विश्व नवकार महामंत्र दिवस 2.0 के प्रचार-प्रसार के लिए रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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