भोपाल , सितंबर 18 -- मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने इंदौर केंद्रीय जेल में आत्महत्या के दो अलग-अलग मामलों में मृतकों के उत्तराधिकारियों को पांच-पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति एक माह में अदा किए जाने की अनुशंसा की है।

आयोग के प्रकरण क्रमांक 0567/इंदौर/2024 के अनुसार 22 जनवरी 2024 को विचाराधीन बंदी अनिल पिता राजू उर्फ राजे मंजे, उम्र 32 वर्ष, निवासी लोहार कॉलोनी, महू नाका, थाना छत्रीपुरा, इंदौर ने केंद्रीय जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जेल अधीक्षक से सूचना मिलने के बाद आयोग ने प्रकरण पर संज्ञान लेकर जांच कराई और मामले में निरंतर सुनवाई की।

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 (ई) के तहत आयोग ने मध्यप्रदेश शासन को मृतक बंदी के उत्तराधिकारियों को पांच लाख रुपये की प्रतिकर राशि एक माह में अदा करने की अनुशंसा की है। साथ ही जेलों में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जेलों में मनोवैज्ञानिक चिकित्सा सेवाएं एवं परामर्श की व्यवस्था सुदृढ़ करने की अनुशंसा की गई है।

दूसरे मामले में आयोग के प्रकरण क्रमांक 5975/इंदौर/2021 के अनुसार 21 अगस्त 2021 को दंडित बंदी अनिल पुत्र वीरसिंह यादव, उम्र 48 वर्ष, निवासी पुराना आजाद नगर, इंदौर ने केंद्रीय जेल में गला काटकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की सूचना मिलने पर आयोग ने संज्ञान लेकर प्रकरण दर्ज किया और जांच एवं सुनवाई की।

इस मामले में भी आयोग ने मध्यप्रदेश शासन को मृतक के उत्तराधिकारियों को पांच लाख रुपये की प्रतिकर राशि एक माह में अदा करने की अनुशंसा की है। साथ ही जेलों में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग करने की अनुशंसा की गई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित