भुवनेश्वर , जून 19 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीकांत जेना ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से खनिज कराधान पर उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले को लागू करने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में श्री जेना ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस ऐतिहासिक फैसले को दिये करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन ओडिशा सरकार ने इसे लागू करने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। झारखंड, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने उच्चतम न्यायालय से मिले अधिकारों का उपयोग कर अपने वित्तीय हितों की रक्षा के लिए पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है।
जुलाई-अगस्त 2024 में आये इस फैसले का जिक्र कर श्री जेना ने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना था कि खनिजों पर रॉयल्टी कोई कर नहीं है और राज्यों के पास खनिजों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर व उपकर लगाने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लगातार निष्क्रियता के कारण राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। उन्होंने खनिजों और खनिज-युक्त भूमि पर 50 प्रतिशत कर और उपकर लगाने तथा राज्य के पिछले बकाये की वसूली शुरू की मांग की है।
उन्होंने दावा किया कि ओडिशा भविष्य में सालाना लगभग एक लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर सकता है और करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये पिछले बकाये में वसूल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देरी का हर एक दिन राज्य के लोगों को उनकी प्राकृतिक संपदा से मिलने वाले संसाधनों से वंचित कर रहा है, जबकि जन कल्याण और विकास की कीमत पर कॉर्पोरेट हितों तथा खनन सिंडिकेट को फायदा पहुंचा रहा है।
श्री जेना का कहना है कि अगर उच्चतम न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद सरकार कदम उठाती तो इस अतिरिक्त कमाई का इस्तेमाल युवाओं के बेरोजगारी भत्ते, महिलाओं की कल्याण योजनाओं, बेहतर स्वास्थ्य-शिक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में होता। राष्ट्रीय खनन क्षेत्र में ओडिशा के योगदान का जिक्र कर उन्होंने कहा कि भारत के कुल खनिज उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है। इसलिए यहां के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली कमाई में ओडिशा का बराबर का हक बनता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) को लगातार लागू न किये जाने पर भी चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि जमीन, जंगल और संसाधनों पर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित क्षेत्रों में खनन पट्टे और परियोजना को मंजूरी देने के लिए फर्जी ग्राम सभाएं बुलायी जा रही हैं।
श्री जेना ने मुख्यमंत्री से 'पेसा' कानून को पूरी तरह लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार यह तय करे कि हेरफेर या फर्जी ग्राम सभा के जरिये किसी भी खनन परियोजना को मंजूरी न मिले। उन्होंने तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ओडिशा और यहां की जनता के व्यापक हित में ऐसा करना बेहद जरूरी है।
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