पटियाला , मई 04 -- पावर सेक्टर संयुक्त कार्रवाई समिति (पीएस-जेएसी) ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते (डीए) एवं राहत राशि (डीआर) के बकाया भुगतान संबंधी उच्च न्यायालय के आदेशों को चुनौती देने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
पावर सेक्टर कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनरों की संयुक्त कार्रवाई समिति के सचिव अजय पाल सिंह अटवाल ने सोमवार को कहा कि डीए जारी करने संबंधी आदेश के खिलाफ दायर अपील में पीएसपीसीएल ने दावा किया है कि वह कोई सरकारी विभाग नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र वाणिज्यिक इकाई है, जो पंजाब राज्य विद्युत विनियामक आयोग (पीएसईआरसी) की निगरानी में कार्य करती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सेवा शर्तें, वेतन, भत्ते और महंगाई भत्ता पीएसपीसीएल के अपने कॉर्पोरेट नियमों के तहत संचालित होते हैं।
जेएसी के अनुसार, पीएसपीसीएल ने पीएसईआरसी ढांचे के तहत नियामकीय बाधाओं का हवाला देकर कर्मचारियों और पेंशनरों के वैध डीए/डीआर बकाया से इनकार करने की कोशिश की है। समिति ने स्पष्ट कहा कि डीए/डीआर सरकारी पैटर्न पर आधारित वैधानिक अधिकार है, जिसे मनमाने वित्तीय या नियामकीय कारणों का बहाना बनाकर रोका नहीं जा सकता।
समिति ने कहा कि पीएसपीसीएल के कर्मचारियों और पेंशनरों को हमेशा राज्य सरकार के अनुरूप लाभ दिए जाते रहे हैं, इसलिए इस स्तर पर किसी भी प्रकार का बदलाव मनमाना और भेदभावपूर्ण है। जेएसी नेताओं ने कहा कि एक ओर प्रबंधन पीएसपीसीएल को 7,800 करोड़ रुपये के लाभ में दिखा रहा है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों और पेंशनरों के वैध बकाये रोकने के लिए वित्तीय संकट का हवाला दे रहा है। इस तरह के विरोधाभासी दावे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसी मामले में पहले पीएसपीसीएल ने अदालत में कहा था कि महंगाई भत्ता पंजाब सरकार के अनुरूप दिया जाएगा। वर्तमान रुख उसके पहले के रुख से स्पष्ट और अनुचित विचलन है।
समिति के अनुसार, राजस्व स्रोतों और नियामकीय व्यवस्थाओं में अंतर बताकर डीए से इनकार करना कर्मचारियों का मनोबल गिराने वाला कदम है और समानता तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
पीएसपीसीएल के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा कि ट्रांसफर स्कीम, त्रिपक्षीय समझौते की धारा 3, ट्रांसफर स्कीम की धारा 6(5) और बिजली अधिनियम 2003 की धारा 133 के अनुसार कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
पावर सेक्टर संयुक्त कार्रवाई समिति ने पीएसपीसीएल प्रबंधन से मांग की है कि वह तुरंत अपनी याचिका वापस ले और हाईकोर्ट के आदेशों को पूरी भावना के साथ लागू करे। समिति ने कहा कि ऐसे मामलों में मुकदमेबाजी लंबी खींचने से संगठन में विश्वास कम होता है और अनावश्यक टकराव पैदा होता है।
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