नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि वर्षों के निरंतर शैक्षणिक योगदान के माध्यम से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने अकादमिक उत्कृष्टता की एक सशक्त और विशिष्ट परंपरा स्थापित की है।

श्री प्रधान ने आज यहां जेएनयू के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षों के निरंतर शैक्षणिक योगदान के माध्यम से जेएनयू ने अकादमिक उत्कृष्टता की एक सशक्त और विशिष्ट परंपरा स्थापित की है। जेएनयू उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में रहा है, जिसने अंतर-विषयक वातावरण में वास्तविक अकादमिक स्वायत्तता को आत्मसात किया है और जहां आलोचनात्मक चिंतन विश्वविद्यालय की आत्मा रहा है।

उन्होंने दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे जेएनयू की समावेशिता, सामाजिक न्याय और जिम्मेदारी की परंपरा को आगे बढ़ाएं, वंचित वर्गों की आवाज़ बनें और असमानताओं को कम करने की दिशा में ठोस रणनीतियां विकसित करें।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जेएनयू के विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में देश का नेतृत्व कर सकते हैं-कुछ संसद और विधानसभाओं में पहुंचकर लोकतंत्र को सुदृढ़ करेंगे, कुछ कर्तव्य भवन में राष्ट्र सेवा का दायित्व निभाएंगे, कुछ रणनीतिक विशेषज्ञ और राजनयिक बनकर भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करेंगे। वहीं, कुछ नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से स्टार्ट-अप्स और यूनिकॉर्न्स की नींव रखेंगे, जबकि कुछ लेखक, पत्रकार और समाज के विचारशील नेतृत्वकर्ता बनकर राष्ट्रीय वैचारिक विमर्श को दिशा देंगे।

उन्होंने कहा कि देश को जेएनयू के विद्यार्थियों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को साकार करने में सक्रिय, सकारात्मक और सार्थक योगदान की अपेक्षा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित