बैतूल , अगस्त 03 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के प्रवेश के बाद असमान स्थिति सामने आई है। जहां जिला मुख्यालय स्थित शासकीय जेएच कॉलेज में लगभग सभी सीटों पर प्रवेश हो चुका है, वहीं घोड़ाडोंगरी और मुलताई के सरकारी महाविद्यालय छात्र-छात्राओं की कमी से जूझ रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले के 10 शासकीय महाविद्यालयों में कुल 15,685 सीटों के मुकाबले 9,352 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जबकि 6,333 सीटें रिक्त हैं। शासकीय जेएच कॉलेज, बैतूल में स्नातक की 3,350 सीटों में से 3,349 पर प्रवेश हो चुका है और केवल एक सीट रिक्त है। महाविद्यालय की कुल 6,250 सीटों में 5,264 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि जिले के विद्यार्थियों की पहली पसंद अब भी जेएच कॉलेज बना हुआ है।
इसके विपरीत शासकीय महाविद्यालय घोड़ाडोंगरी की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। यहां 540 सीटों के मुकाबले केवल 49 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया, जबकि 491 सीटें खाली रहीं। इनमें कला संकाय में 23 और विज्ञान संकाय में 26 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
संख्यात्मक रूप से सबसे अधिक रिक्त सीटें शासकीय महाविद्यालय मुलताई में दर्ज की गईं। यहां स्नातक की 1,730 सीटों में से 996 रिक्त हैं। इनमें कला संकाय की 521, विज्ञान की 335 और वाणिज्य की 140 सीटें शामिल हैं।
अन्य शासकीय महाविद्यालयों में गर्ल्स कॉलेज बैतूल में 137, आठनेर में 402, भैंसदेही में 373, आमला में 264, शाहपुर में 407, सारणी में 379 तथा भीमपुर में 251 सीटें रिक्त हैं।
स्नातकोत्तर स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं रही। जिले में दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की 3,945 सीटों में से 2,202 पर प्रवेश हुआ है, जबकि 1,743 सीटें खाली हैं। वहीं एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में जेएच कॉलेज, आठनेर और भैंसदेही में उपलब्ध 1,150 सीटों के मुकाबले केवल 261 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। आठनेर और भैंसदेही महाविद्यालयों में एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर शैक्षणिक संसाधन, विषयों की उपलब्धता, परिवहन सुविधा तथा रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों की कमी के कारण छोटे कस्बों के शासकीय महाविद्यालयों में प्रवेश लगातार घट रहा है, जबकि जिला मुख्यालय स्थित महाविद्यालय विद्यार्थियों की पहली पसंद बने हुए हैं।
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