श्रीनगर , अगस्त 22 -- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जम्मू-कश्मीर में बिजली दरों में औसतन 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
नियामक द्वारा जारी दर आदेश के अनुसार, संशोधित दरें 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी होंगी, और उस तारीख से खपत की गयी बिजली का बिल नयी दरों के हिसाब से दिया जायेगा। इस बढ़ोतरी से जम्मू-कश्मीर भर के उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ने की संभावना है। दरों में संशोधन से विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आयी है और नेताओं ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के अपने 2024 के विधानसभा चुनाव के वादे को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को जनता के साथ "विश्वासघात" करार दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय उपभोक्ताओं को भारी बिलों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा, "नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। लेकिन उस प्रतिबद्धता को पूरा करने के बजाय, लोग अब बिजली दरों में वृद्धि का सामना कर रहे हैं। यह राहत नहीं है। यह सरकार पर जताये गये भरोसे के साथ विश्वासघात है।"पीडीपी नेता और विधायक वहीद पार्रा ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब बेरोजगारी और महंगाई पहले से ही आम परिवारों पर दबाव डाल रही थी।
श्री पार्रा ने 'एक्स' पर एक संदेश में कहा, "ऐसे समय में जब बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई बुरी तरह सता रही है और आम परिवार गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, सरकार ने बिजली दरों में 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी थोप दी है।"पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और विधायक सज्जाद लोन ने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी उन उपभोक्ताओं के लिए एक "झटका" होगी, जिनसे मुफ्त बिजली का वादा किया गया था।
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