अलवर , अक्टूबर 11 -- राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गांवों की बदहाली, किसानों की बिजली-पानी की समस्या, स्कूलों और अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और ग्रामीण रोजगार को लेकर सवाल उठाए।

श्री जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री को पंचायत चुनाव से पहले तीन वर्ष के कामों का संकल्प पत्र जारी करना चाहिए और बताना चाहिए कि गांवों में कितने अटल पथ बने, विद्यालयों की स्थिति में कितना सुधार हुआ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में दवाइयों एवं स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों की बिजली काटकर उद्योगों को बिजली दी और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं की अनदेखी की। श्री जूली ने पेंशन, पालनहार, छात्रवृत्ति और किसानों से जुड़ी योजनाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि दो-दो वर्ष तक पंचायत चुनाव नहीं कराकर पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर किया गया और गरीबों से जुड़ी योजनाओं को नुकसान पहुंचाया गया। मनरेगा को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए श्री जूली ने आरोप लगाया कि योजना का बजट लगातार घटाया गया और नाम बदलकर ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया, जिससे गरीबों को काम नहीं मिल रहा है। इससे गांवों से पलायन बढ़ने की आशंका है।

श्री जूली ने राजस्थान में 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश के दावों पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से पूछा कि पिछले तीन वर्ष में वास्तव में कितना निवेश आया और गांवों से पलायन रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए।

उन्होंने चेतावनी दी कि पंचायत चुनाव में राज्य की जनता सरकार से इन सवालों का जवाब मांगेगी और नगर निकायों में कथित तानाशाही के बाद अब गांवों में भी सरकार को विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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