नयी दिल्ली , मार्च 20 -- जी7 के छह सदस्य देशों जापान, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तथा इटली और नीदरलैंड ने वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की है और कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं।
सात देशों के नेताओं ने गुरुवार रात जारी एक संयुक्त बयान में कहा, "हम खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों, तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों और ईरानी बलों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं।'"इन देशों ने बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और ईरान से जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए अवरुद्ध करने के प्रयासों, धमकियों, बारूदी सुरंगों को बिछाने, ड्रोन एवं मिसाइल हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों पर तत्काल व्यापक रोक लगाने की मांग की। बयान में कहा गया कि नौवहन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौता भी शामिल है।
इसमें कहा गया कि ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्गों पर। उन्होंने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तत्पर हैं और हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना बना रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समन्वित निकासी को अधिकृत करने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए अन्य कदम उठाने का संकल्प लिया जिसमें कुछ तेल एवं गैस उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर काम करना शामिल है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावित देशों को सहायता करने के लिए भी काम करेंगे।
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