पटना , अक्टूबर 26 -- िहार में वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जीविका) ने महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके तहत राज्य में दिव्यांगजनों और वृद्धजनों के लिए अलग-अलग विशेष स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। इन समूहों के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों को आर्थिक सहयोग, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ, आवश्यक प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

जीविका की इस पहल का उद्देश्य इन वर्गों को केवल सरकारी सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना तथा समाज की मुख्यधारा में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

जीविका के माध्यम से संचालित स्वयं सहायता समूहों से बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पहले से जुड़े हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 14 लाख 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से लगभग 2 लाख 42 हजार दिव्यांगजन जुड़े हैं। इनके सशक्तीकरण और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए अब विशेष समूहों के गठन पर जोर दिया जा रहा है, जिससे उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

इस पहल के तहत दिव्यांगजनों और वृद्धजनों के लिए पुरुष, महिला और मिश्रित समूहों का गठन किया जा रहा है। इन समूहों को नियमानुसार 30 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड तथा 1.50 लाख रुपये का इनिशियल कैपिटलाइजेशन फंड उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे समूह के सदस्यों को आर्थिक गतिविधियां शुरू करने, छोटे व्यवसाय विकसित करने और आजीविका के साधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

इस पहल के तहत राज्य में अब तक दिव्यांगजनों के लिए 8,299 विशेष समूहों का गठन किया जा चुका है। वहीं, तीन जिलों में वृद्धजनों के लिए 686 विशेष समूह बनाए गए हैं। इन समूहों से 50,486 दिव्यांगजन और 8,559 वृद्धजन जुड़ चुके हैं। विशेष समूहों के माध्यम से लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण देने और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे उन्हें अपनी जरूरतों के अनुरूप सहायता प्राप्त करने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

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