पटना , जनवरी 14 -- बिहार ग्रामीण विकास विभाग की ओर से राज्य भर में संचालित हो रही दीदी की रसोई के जरिये महिलाएं न सिर्फ अपने स्वरोजगार के लिए नई जमीन तलाश कर रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य वर्धक और पारंपरिक व्यंजनों की मिठास भी खाने की थाली में परोस रही हैं।
जीविका दीदी की रसोई बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य रोगियों, छात्रों, आम नागरिकों को स्वच्छ, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। इसका संचालन राज्य भर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के हाथों किया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार राज्य में अभी तक 340 दीदी की रसोई संचालित की जा रही है। इसके सहारे करीब छह हजार से भी अधिक महिलाओं के हाथों को रोजगार मिल चुका है। दीदी की रसोई में चाय, कॉफी और दूसरे नाश्ते के साथ बिहार की पारंपरिक पहचान चूड़ा, घुघनी, लिट्टी-चोखा आदि व्यंजन तैयार किया जा रहा है। सरकारी विभागों में संचालित दीदी की रसोई में वहां की मांग के अनुसार भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला अस्पताल और आवासीय स्कूलों में तय मीन्यू के अनुसार ही नाश्ता और भोजन परोसा जा रहा है।
समूह से जुड़ी महिलाओं के हाथों तैयार नाश्ता और भोजन की गुणवत्ता जहां बाजार से कई गुनी अधिक होती है वहीं कम कीमत पर ही लोग पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन की लुत्फ उठा रहे हैं।
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