जोधपुर , अगस्त 27 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जीवन में हारको भी जीत जितनी ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि भले ही जीतने वाला ही सिकंदर कहलाता है लेकिन यह भी सच है कि जीतकर हम जितना सीखते हैं, उससे कहीं ज्यादा हारकर सीखते हैं।

श्री शेखावत ने गुरुवार को यहां खेलो इंडिया डायलॉग-युवा संवाद में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हार व्यक्ति को अपनी कमियों को पहचानने, उन्हें दूर करने और पहले से अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ने का अवसर देती है।

उन्होंने कहा कि कई बार जीतने वाला व्यक्ति अपनी सफलता को ही अंतिम लक्ष्य मान लेता है, जबकि हार का सामना करने वाला खिलाड़ी उस हार को आत्मसात कर अगली बार नयी ऊर्जा, नये जोश और नये संकल्प के साथ मैदान में उतरता है। उन्होंने कहा कि जीत को पचाना और आगे भी जीतने की भूख बनाये रखना जरूरी है। वहीं, हर हार के बाद नए जज्बे के साथ खड़ा होना भी उतना ही जरूरी है।

श्री शेखावत ने कहा कि जीत के बाद सबसे बड़ी सीख यही होनी चाहिए कि जीत को अंतिम मुकाम न माना जाये। उन्होंने अपनी जीवन यात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने देखा है कि राज्य स्तर पर जीतकर आने वाले कई लोगों की कॉलर ऊंची हो जाती है और राष्ट्रीय स्तर पर जीतने के बाद कई बार कॉलर इतनी ऊंची हो जाती है कि व्यक्ति आगे सीखना ही बंद कर देता है।

उन्होंने कहा कि जीत को पचाना और आगे और जीतने की भूख बनाये रखना जरूरी है। इसी तरह हर हार के बाद नये जज्बे के साथ खड़ा होना जरूरी है।

उन्होंने कहा," खेल का मैदान व्यक्ति को हर दिन कुछ नया सिखाता है। मैदान हार को स्वीकार करना और उससे सीखना सिखाता है। 'अगली बार मैं और बेहतर करूंगा', यह संकल्प केवल एक खिलाड़ी ही सही मायने में समझ सकता है। "उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना सामूहिक संकल्प है। केवल आर्थिक, सामरिक या तकनीकी क्षेत्र में विकास कर लेना ही भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र नहीं बनाएगा। इसके लिए हर विधा और हर क्षेत्र में समान रूप से विकास और उत्कृष्टता जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान, तकनीक सहित हर क्षेत्र में उतना ही समृद्ध और सक्षम होना होगा, जितना वह खेल के विभिन्न मंचों पर अपनी प्रतिभा के दम पर बनने की कोशिश कर रहा है। विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश की प्रगति हर क्षेत्र में दिखाई देगी।

श्री शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सोच में बदलाव आया है। अब सरकार खिलाड़ी के राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का इंतजार नहीं कर रही, अपितु प्रतिभा को शुरुआती स्तर पर पहचानकर उसे आगे बढ़ाने के लिए सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में सरकार ने 'कृति' नाम से पहल शुरू की है, जो शुरुआती स्तर पर प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में भारत का लक्ष्य 2036 में होने वाले ओलंपिक के लिए विश्व स्तरीय खिलाड़ियों की मजबूत फौज तैयार करना है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जब भारत ओलंपिक के मैदान में उतरे तो देश के खिलाड़ियों का डंका बजे और दुनिया के सामने भारतीय प्रतिभा का परचम लहराये। उन्होंने कहा कि 2036 के ओलंपिक में भारत की सफलता ऐसी हो कि खेल के मैदान में 'वंदे मातरम्' की गूंज सुनाई दे। यह लक्ष्य केवल पदक जीतने का नहीं,अपितु भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने का है।

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