उदयपुर , मई 15 -- राजस्थान में उदयपुर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनभर की मेहनत से अर्जित संपत्ति के उचित वितरण के लिए वसीयत अवश्य बनाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के पारिवारिक विवाद से बचने के लिए वसीयत के साथ चिकित्सा प्रमाण पत्र भी संलग्न करे।
श्री शर्मा शुक्रवार को यहां रोटरी क्लब ऑफ उदयपुर द्वारा आयोजित सीनियर सिटीजन राइट्स एंड विल विषयक विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों एवं उनकी सुरक्षा एवं वसीयत से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि वसीयत का रजिस्टर्ड होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन उसमें दो गवाहों का होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही वसीयत प्रभावी होती है। सही तरीके से बनाई गई वसीयत भविष्य में पारिवारिक विवादों को रोकने के साथ परिवार में पारदर्शिता एवं सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम की जानकारी देते हुए कहा कि माता.पिता के भरण.पोषण की जिम्मेदारी संतान की होती है, चाहे वसीयत लिखी गई हो या नहीं। नए कानूनी प्रावधानों के अनुसार संतान को माता.पिता के भरण.पोषण के लिए हर महीने आर्थिक सहायता देना आवश्यक है। साथ ही बैंक खाते एवं लॉकर खोलते समय नॉमिनी नियुक्त करने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि मृत्यु के पश्चात संपत्ति संबंधी विवाद उत्पन्न न हों।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रोटेरियंस एवं नागरिकों ने कानूनी विषयों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका न्यायाधीश श्री शर्मा ने सरल एवं व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया।
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