नयी दिल्ली , मई 21 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के लिए शुरू किए गए यूएमएमआईडी (वंशानुगत विकारों के इलाज की अनूठी विधियां) कार्यक्रम को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा है कि भारत तेजी से जीनोम आधारित और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरूवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि आने वाले समय में इलाज और निदान मरीजों की आनुवंशिक प्रोफाइल के अनुसार तय किए जाएंगे और यही चिकित्सा क्षेत्र का भविष्य होगा। उन्होंने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक रोग लंबे समय तक उपेक्षित रहे, क्योंकि इनके निदान और उपचार की सुविधाएं सीमित तथा महंगी थीं। उन्होंने कहा कि यूएमएमआईडी कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे परिवारों को किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस मौके पर उन्होंने यूएमएमआईडी संकलन का विमोचन और यूएमएमआईडी डैशबोर्ड का शुभारम्भ भी किया, जिससे आनुवंशिक विकारों के निदान, परामर्श और जागरूकता अभियानों को देशभर में मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार, स्वास्थ्य बीमा कवरेज को मजबूत करने और सस्ती दवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने दुर्लभ आनुवंशिक रोगों को "मूक लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती" बताते हुए कहा कि प्रभावित परिवार अक्सर वर्षों तक सही इलाज की तलाश में भटकते रहते हैं। ऐसे में प्रारंभिक जांच, आनुवंशिक निदान और चिकित्सकीय परामर्श की मजबूत व्यवस्था बेहद जरूरी है।

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