अहमदाबाद , जनवरी 22 -- गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (जीटीयू) के 15वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को विश्वविद्यालय की विभिन्न विद्याशाखाओं के कुल 36,935 विद्यार्थियों को डिग्री एवं डिप्लोमा प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त 70 शोधार्थियों को पीएच.डी. की डिग्री तथा 147 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

जीटीयू के 15वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को प्रेरणादायी मार्गदर्शन देते हुए कहा कि अगर शिक्षित व्यक्ति दूसरों के दुःख को नहीं समझ सके, तो ऐसा शिक्षा पत्थर के समान है। राज्यपालश्री ने तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिकता, ईमानदारी और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

अहमदाबाद स्थित साइंस सिटी में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में गुजरात के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री देवव्रत ने बीते एक दशक में देश की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 11 वर्ष पूर्व भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के परिणामस्वरूप आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि आज देश में रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे तथा अन्य बुनियादी ढांचे विश्व के विकसित देशों के समकक्ष आधुनिक एवं तकनीक-सज्जित बने हैं। सुदृढ़ सड़क नेटवर्क के कारण जहां पहले दिनों की यात्रा करनी पड़ती थी, वहीं अब वही दूरी कुछ घंटों में पूरी हो रही है।

दीक्षांत समारोह की थीम स्वदेशी और आत्मनिर्भर का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जब हमारे युवा विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण करते हैं तो हमें गर्व होता है, किंतु यह भी स्मरण रखना चाहिए कि भारत की धरती ने ही विश्व को संस्कार, चरित्र और जीवन-मूल्यों की शिक्षा दी है। एक समय था जब पूरी दुनिया से लोग भौतिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने भारत आते थे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज विश्व के पास भौतिक साधनों की कोई कमी नहीं है, किंतु मानसिक शांति का अभाव बढ़ता जा रहा है। यदि पढ़ा-लिखा व्यक्ति दूसरे के दुःख को अपना न समझ सके, तो ऐसा शिक्षा पत्थर के समान है। सच्चा शिक्षित वही है जो संवेदनशील हो और नैतिक मूल्यों से युक्त हो।

इस अवसर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आशीष चौहान ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है और आने वाला समय भारत का है। उन्होंने कहा कि तकनीक केवल एक साधन है, जो मानवीय इरादों को अधिक मजबूत बनाती है। वास्तविक सफलता केवल अत्याधुनिक प्रणालियों से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, अनुशासन और नैतिकता पर आधारित मानवीय क्षमताओं से प्राप्त होती है।

जीटीयू की कुलपति डॉ. राजुल गज्जर ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में अनुसंधान, नवाचार और उच्च शैक्षणिक अध्ययन लगातार सुदृढ़ हो रहे हैं। विश्वविद्यालय उद्योग, नवाचार और अवसंरचना के समन्वय के माध्यम से तकनीकी मानव संसाधन, व्यावसायिक नेतृत्व और ज्ञान-आधारित कार्यशक्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया के अंतर्गत एक अभिनव पहल के रूप में आज दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी अपने प्रमाणपत्र सीधे अपने डिजिलॉकर में देख सकेंगे।

जीटीयू के कुलसचिव डॉ. के.एन. खेर ने स्वागत सम्बोधन में कहा कि आज विद्यार्थियों के जीवन में एक नये अध्याय का शुभारंभ हुआ है। उन्होंने शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने हेतु प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर जानकारी प्राप्त की।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित