श्रीगंगानगर , मार्च 28 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले में नहरी विभाग द्वारा आबियाना (सिंचाई शुल्क) वसूली के साथ बराबर का ब्याज लगाने के आदेश को ग्रामीण मजदूर किसान समिति (जीकेएस) ने तुगलकी फरमान करार देते हुए सख्त विरोध जताया है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि किसी भी किसान की पानी की बारी काटने की कोशिश की गयी, तो पूरे जिले में आंदोलन किया जाएगा।

ग्रामीण मजदूर किसान समिति के प्रदेश महासचिव एवं पूर्व सरपंच संतवीर सिंह मोहनपुरा ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा कि हम आबियाना वसूली के खिलाफ नहीं हैं, क्योंकि आबियाना से ही नहरों की सफाई रखरखाव और बरसाती तूफान में मरम्मत होती है। आबियाना का एक हिस्सा नहर अध्यक्ष के पास जाता है और उसी से सफाई करवाई जाती है। सरकार इस काम के लिए अलग से कोई बजट नहीं देती।

उन्होंने कहा कि हमारा विरोध केवल आबियाना पर लगाये गये अतिरिक्त ब्याज से है, जो आबियाना के बराबर लिया जा रहा है। इतना ब्याज तो कोई निजी फाइनेंसर भी नहीं लेता जितना नहरी विभाग ले रहा है। नहरी विभाग इस ब्याज को ब्याज नहीं बल्कि दंड के रूप में वसूल रहा है।

श्री मोहनपुरा ने बताया कि इस वर्ष पूरे सिंचाई सत्र में नहरों में पानी की भारी कमी रही। हर किसान की फसल प्रभावित हुई। गेहूं जौ और सरसों की फसलें ट्यूबवेल के खारे-मीठे पानी से डीजल खर्च करके लगायी गयीं। पानी बंदी के दौरान विभाग ने जो वायदे किये थे, वे भी पूरे नहीं हो सके। इसके बावजूद किसानों से ब्याज के नाम पर दंड वसूला जा रहा है।

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