बैतूल , फरवरी 25 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड में कथित लापरवाही और अमानवीय व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है।

प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला के पेट पर स्टाफ द्वारा दबाव डालने के बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद प्रसूता गहरे सदमे में है और उसकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती बताई जा रही है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिवार के अनुसार, यह घटना 20 फरवरी की रात की है। शाकादेही निवासी योगेश यादव अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि प्रसूता को तेज दर्द होने के बावजूद ड्यूटी पर मौजूद नर्स और स्टाफ ने समय पर कोई ध्यान नहीं दिया। रात करीब ढाई बजे जब परिजनों ने स्टाफ को जगाया, तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए प्रसूता के साथ अभद्र व्यवहार किया।

पति योगेश यादव का आरोप है कि प्रसव के दौरान स्टाफ ने महिला के पेट पर जोर से दबाव डाला, जिससे नवजात की मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्टाफ ने अमानवीय टिप्पणी करते हुए कहा कि "तुमने कोई पाप किया होगा, इसलिए बच्चा नहीं हो रहा है।" इस घटना के बाद से प्रसूता गहरे मानसिक आघात में है और उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।

परिजन का कहना है कि वे प्रसूता को निजी अस्पताल में भर्ती कराना चाहते थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें समझाकर जिला अस्पताल में ही इलाज जारी रखने को कहा। घटना से आक्रोशित परिवार ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अक्षत जैन ने तत्काल सिविल सर्जन को जांच के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने ड्यूटी पर मौजूद नर्स और क्लास-IV स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में सर्जन डॉ. रंजीत राठौर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष ठाकुर और डॉ. ईशा डेनियल शामिल हैं। समिति को पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित