नयी दिल्ली , अक्टूबर 24 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को दिल्ली एनसीआर के लिए एक अत्याधुनिक 'वायु प्रदूषण विश्लेषण' सुविधा का उद्घाटन किया जो विश्लेषण कर प्रदूषण के स्रोत का संकेत दे कर उसके नियंत्रण में सहायक होगी। यह दुनिया में अपनी तरह की पहली सुविधा बतायी जा रही है।
'एकीकृत वायुमंडलीय रसायन शास्त्र और एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला' (एएटीएएल) के नाम से जानी जाने वाली यह प्रयोगशाला वास्तविक समय में वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान भी करती है। यह एकीकृत क्षमता वास्तविक समय की जानकारी के साथ-साथ अगले चार दिनों का पूर्वानुमान भी प्रदान करेगी।
डॉ सिंह ने यहां भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) की दिल्ली शाखा में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में इसे दुनिया में अपनी तरह की पहली एकीकृत सुविधा बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदुषण की गंभीरता को देखते हुए पहले इसे यहीं स्थापित किया गया है। यह सुविधा केवल प्रदूषण के स्तर की जानकारी ही नहीं प्रदूषणकारी तत्वों की बनावट, उनके स्रोतों, स्वास्थ्य पर उनके संभावित प्रभावों की पहचान भी करेगी।
इस कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव और भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र उपस्थित थे।
उन्होंने कहा, ' एएटीएएल सही समय पर कार्रवाई करने में मदद के लिए वास्तविक समय की जानकारी और पूर्व अनुमान भी उपलब्ध कराएगी।' दिल्ली एनसीआर के लिए यह सुविधा मोदी सरकार के 'मिशन मौसम' के तहत उपलब्ध कराई गई है। यह एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला है जो आधुनिक वायुमंडलीय मापन उपकरणों, बारीक रासायनिक विश्लेषण, प्रदूषण-स्रोत की पहचान और निर्णय लेने में मदद करने वाली क्षमताओं को एक ही व्यवस्था के भीतर लाती है।
इससे पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने बीते 10-12 वर्षों में वायु-गुणवत्ता के पूर्वानुमान और विश्लेषण में काफी प्रगति की है। एएटीएएल तत्काल वायु प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों के बीच अंतर करने में वैज्ञानिकों और तकनीशियनों की मदद करेगी, जिनमें वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, बायोमास और फसल के अवशेष जलाना, निर्माण कार्य और सड़कों की धूल, तथा आसपास के इलाकों से बहकर आने वाले प्रदूषक शामिल हैं।
मंत्री के संबोधन के दौरान वहां लगी स्क्रीन पर दिख रहा था कि उस समय राजधानी में एक चौथाई वायु प्रदूषण वाहनों के कारण हो रहा था। यह प्रयोगशाला आईआईटीएम के एयरवाइज (उत्सर्जन के लिए वायु गुणवत्ता चेतावनी और एकीकृत निर्णय सहायता प्रणाली) के साथ जुड़ी हुई है, जो प्रदूषण प्रबंधन में मदद के लिए वायु-गुणवत्ता के पूर्वानुमान, टिप्पणियों और स्रोत-बंटवारे की जानकारी को एक साथ जोड़ती है।
इस अवसर पर एमएक्यूडब्ल्यूएस के परियोजना निदेशक डॉ. सचिन घुड़े ने कहा कि यह एकीकृत सुविधा पराली जलाने, वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य और सड़कों की धूल सहित प्रदूषण में योगदान देने वाले स्रोतों के बारे में शुरुआती चेतावनी और विस्तृत जानकारी देकर दिल्ली-एनसीआर में वायु-गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करेगी। उन्होंने आगे कहा कि इससे जुड़ा वायु-गुणवत्ता पूर्वानुमान तंत्र अगले 72 घंटों के लिए 400 मीटर के दायरे में पूर्वानुमान देता है।
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