जालौन , जून 22 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से वन विभाग ने इस वर्ष व्यापक वृक्षारोपण अभियान की तैयारी पूरी कर ली है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) प्रदीप कुमार ने बताया कि जिले में विभिन्न प्रजातियों के लाखों पौधे तैयार किए गए हैं, जिन्हें सरकारी विभागों, संस्थाओं तथा किसानों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस बार किसानों के लिए सफेद चंदन के पौधों की भी व्यवस्था की गई है, जो प्रगतिशील किसानों को निःशुल्क वितरित किए जाएंगे।
डीएफओ ने बताया कि जनपद में वंदे मातरम वाटिका, महर्षि चरक वन, समृद्धि वन, कपि वन, ऊर्जा वन, अविरल धारा वन, खाद्य वन, त्रिवेणी वन, शक्ति वन तथा मित्रवन जैसी विशेष थीम आधारित वन परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत पीपल, बरगद, पाकड़, शीशम, सागौन, अर्जुन, आंवला, जामुन, सहजन, नीम, महोगनी, कटहल, नींबू, आम, अमरूद और अन्य उपयोगी प्रजातियों का रोपण किया जाएगा।
वन विभाग द्वारा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना बनाई गई है, जहां लगभग 50 हजार पौधे लगाए जाएंगे। वहीं उकासा और बोहदपुरा वन ब्लॉकों में अविरल धारा योजना के तहत कुल 88 हजार पौधों का रोपण प्रस्तावित है। विभिन्न विशेष वनों में कुल हजारों पौधे लगाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र का हरित आवरण बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पौधशालाओं में तैयार पौधों के आंकड़ों के अनुसार फलदार प्रजातियों में जामुन, नींबू, आम, अमरूद, आंवला, बेल, बहेड़ा, कटहल, करौंदा, इमली और शहतूत के लाखों पौधे उपलब्ध हैं। इसके अलावा छायादार एवं इमारती प्रजातियों में शीशम, सागौन, चिलबिल, नीम, अर्जुन, महोगनी, बबूल, खैर, कदम्ब, गुलमोहर और पाकड़ की बड़ी संख्या में पौधे तैयार किए गए हैं। औषधीय एवं शोभाकार पौधों की भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
डीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि वृक्षारोपण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी सुरक्षा और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में पौधे लेकर अपने खेतों, बागों और खाली भूमि पर रोपण करने की अपील की। उनका कहना है कि वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
वन विभाग के अनुसार इस अभियान से न केवल जिले में हरित क्षेत्र का विस्तार होगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, भूजल संरक्षण तथा जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित