जालौन , जुलाई 18 -- उत्तर प्रदेश में जालौन जिले की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने भोले-भाले लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर और सिम कार्ड जारी कराकर विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके एक सदस्य को गिरफ्तार किया है।

आरोपी के कब्जे से वारदात में प्रयुक्त दो की-पैड मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किया गया है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी ने शनिवार को बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त एक संदिग्ध मोबाइल नंबर के आधार पर आठ जुलाई को साइबर क्राइम थाना उरई में मानपुर निवासी दीपेन्द्र कुमार (थाना सिरसाकलार) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

उन्होंने बताया कि विवेचना के दौरान छह सदस्यीय गिरोह की संलिप्तता सामने आई। तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से पुलिस ने शनिवार को इकलाशपुरा चौराहे के पास से मुख्य आरोपी दीपेन्द्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और मोबाइल सिम कार्ड जारी कराता था। बाद में इन्हीं खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते और विभिन्न मामलों में कार्रवाई या मुकदमा निपटाने का डर दिखाकर उनसे धनराशि अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।

जांच के दौरान घटना में प्रयुक्त 12 सिम कार्डों का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर सत्यापन कराया गया। इसमें बिहार सहित विभिन्न राज्यों से संबंधित 24 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिलीं, जिससे गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ।

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने स्वीकार किया कि गिरोह बिहार पुलिस से जुड़े मामलों की जानकारी सार्वजनिक वेबसाइटों से जुटाता था। इसके बाद संबंधित वादियों को फोन कर स्वयं को पुलिस अधिकारी बताता और मुकदमा निपटाने या कानूनी कार्रवाई से बचाने का झांसा देकर उनसे रुपये अपने द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में जमा करा लेता था।

अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही आरोपियों के आपराधिक इतिहास, बैंक खातों के लेनदेन और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल, फर्जी पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी के नाम पर धनराशि जमा करने के लिए कहे जाने पर तत्काल सत्यापन करें और संदिग्ध मामलों की सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर थाने को दें।

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