जालौन , जून 20 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में वन संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ताजा सर्वेक्षण के अनुसार जिले के वनावरण में 6.41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुल वन क्षेत्र में 400 हेक्टेयर से अधिक नई भूमि भी शामिल हुई है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) प्रदीप कुमार ने बताया कि जिले में पहले लगभग 25 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र निर्धारित था। अब इसमें 400 हेक्टेयर से अधिक नए क्षेत्र का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त भूमि अन्य जिलों, विशेषकर सहारनपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित वन भूमि के प्रतिपूरक प्रबंधन के तहत जालौन को आवंटित की गई है।
उन्होंने बताया कि वन क्षेत्र में वृद्धि के पीछे वन विभाग के प्रयासों के साथ-साथ आम जनता की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय नागरिकों ने वृक्षारोपण अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे जिले में हरियाली का दायरा तेजी से बढ़ा है।
श्री कुमार ने कहा कि वन विभाग ने केवल पौधरोपण तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पौधों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया। इसी क्रम में गत वर्ष प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगर निकाय में 'हरिशंकरी पौधरोपण अभियान' के तहत पीपल, पाकड़ और बरगद के पौधे लगाए गए तथा उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 'शक्ति वन' अवधारणा के तहत आम, नीम और कदंब के पौधों का रोपण किया जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायतों से समन्वय स्थापित कर व्यापक स्तर पर पौधरोपण की तैयारियां की जा रही हैं।
वन अधिकारियों के अनुसार वनावरण में हुई वृद्धि से जिले के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी। इससे भूजल स्तर में सुधार, जैव विविधता के संरक्षण तथा तापमान नियंत्रण में भी मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की यह पहल हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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