जालौन , सितंबर 03 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में सरकारी जमीन को निजी संपत्ति में बदलने के प्रयास का मामला सामने आया है। प्रशासनिक जांच में उरई के ग्राम लहरिया स्थित करीब 450 करोड़ रुपये मूल्य की 7.26 एकड़ नजूल भूमि के संबंध में फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के तथ्य सामने आने के बाद कोतवाली उरई में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

मामला गाटा संख्या 518 की 7.26 एकड़ नजूल भूमि से जुड़ा है। अभिलेखों की जांच में सामने आया कि उक्त भूमि मूल रूप से नजूल संपत्ति है। 15 मार्च 1914 को इसे वार्षिक लीज रेंट जमा करने और आवासीय मकान स्थापित करने की शर्त पर 99 वर्ष के पट्टे पर दिया गया था। पट्टे की शर्तों के अनुसार कलेक्टर की अनुमति के बिना भवन में परिवर्तन करने और भूमि अथवा भवन का मूल उपयोग बदलने पर रोक थी।

अभिलेखों के अनुसार प्रारंभिक लीज ए.के. पसन्ना के नाम दर्ज थी। वर्ष 1918 में उनकी पुत्री एलिस पसन्ना द्वारा बी.सी.एच., पूना के पक्ष में भूमि का विक्रय किए जाने का उल्लेख मिला। इसके बाद बी.सी.एच., पूना के अधिकृत प्रतिनिधि जॉन ई. नॉटन ने 23 सितंबर 1949 को मिस एडेलिन ग्रीगर के पक्ष में विक्रय किया।

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूमि की लीज वर्ष 2014 में समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद भूमि पर अधिकार और उससे जुड़े लेन-देन के दावे किए जाते रहे। जांच के दौरान संबंधित सेल डीड का उल्लेख कलेक्टर उरई के नजूल रजिस्टर और नगर पालिका परिषद उरई के संपत्ति रजिस्टर में नहीं मिला। शासकीय अभिलेखों में भूमि राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज है।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 06 मई और 27 मई 2026 के आदेशों के क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने राजस्व अभिलेखों, नजूल रजिस्टर, खतौनी, पुराने दस्तावेजों समेत अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच की।

जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार मूल आवंटी से भिन्न व्यक्तियों द्वारा वर्ष 1953 में डीड तैयार कर नजूल भूमि को आर्थिक लाभ के उद्देश्य से कूटरचित एवं फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अवैध रूप से विक्रय किए जाने के तथ्य सामने आए। जांच में इन दस्तावेजों के आधार पर ट्रस्ट आदि के गठन का भी उल्लेख किया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि शासकीय अभिलेखों में संबंधित भूमि राज्य सरकार की संपत्ति है।

जांच के निष्कर्षों के आधार पर नगर पालिका परिषद उरई के अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील ने प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली उरई को पत्र भेजकर संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है। प्रकरण में वर्तमान कब्जेदार बेथनी क्रिश्चियन होम्स मिशन/बी.सी.एच. मिशन की प्रबंधक किरन के मसीह, निवासी पटेल नगर, उरई, संस्था से जुड़े अन्य व्यक्तियों तथा नजूल भूमि की खरीद-फरोख्त में शामिल बताए गए व्यक्तियों एवं संस्थाओं को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।

आरोप है कि फर्जी लीज डीड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी भूमि को निजी हित में खुर्द-बुर्द करने, उसका विक्रय अथवा हस्तांतरण करने तथा आर्थिक लाभ अर्जित करने का प्रयास किया गया। प्रशासन का कहना है कि जांच और कार्रवाई के माध्यम से करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी नजूल भूमि को निजी हितों में जाने से रोकने की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई जांच और उसके बाद दर्ज एफआईआर से स्पष्ट है कि सरकारी भूमि से संबंधित अभिलेखों में किसी भी प्रकार की हेराफेरी और उसे निजी संपत्ति में बदलने के प्रयास के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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