, Oct. 17 -- बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली। एजेंसी ने जांच के क्रम में पूरक आरोपपत्र दाखिल किए और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए।विशेष एनआईए अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी मोहम्मद वारिस ने पटना उच्च न्यायालय का रुख किया था। बचाव पक्ष ने लंबे समय से जेल में बंद रहने को जमानत देने का आधार बनाया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने मामले में लगे आरोपों की गंभीरता और मुकदमे की वर्तमान स्थिति पर विचार करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने विचारण अदालत को मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने और प्रतिदिन सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे मामले का शीघ्र निपटारा किया जा सके।

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