चंडीगढ़ , जुलाई 03 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नयी मजबूती देगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कुरुक्षेत्र में होने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के लिए जापानी प्रतिनिधिमंडल को विशेष निमंत्रण दिया जाये और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ाने के प्रयास किये जायें।
मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। रिपोर्ट कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, मानद सचिव उपेंद्र सिंघल और अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण के सदस्य विजय नरूला ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की उपस्थिति में सौंपी।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 18 से 23 जून, 2026 तक जापान में आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान 18 कार्यक्रम आयोजित किये गये। महोत्सव का उद्देश्य जापान में श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश का प्रसार, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना और कुरुक्षेत्र सहित भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था।
महोत्सव के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां जापान की संसद के उच्च सदन, आंतरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के समर्थन संगठन के मुख्यालय, ओसाका विधानसभा और जापान के एक पूर्व प्रधानमंत्री को भेंट की गयीं। टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में गीता के वैश्विक संदेश और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।
इसके अलावा भारत-जापान की सांस्कृतिक समानताओं पर आधारित प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीता यज्ञ, वैश्विक गीता पाठ, गीता सद्भावना यात्रा और अरकावा नदी के तट पर गीता आरती का आयोजन किया गया। महोत्सव का प्रमुख आकर्षण जापान की पारंपरिक काबुकी नाट्य शैली में गीता पर आधारित 40 मिनट की प्रस्तुति रही, जिसे जापानी नागरिकों ने खूब सराहा।
प्रतिनिधिमंडल ने ओसाका के ओटानी विश्वविद्यालय का भी दौरा किया, जहां विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ गीता पर शोध और भारत-जापान के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। वहीं, क्योटो के मेयर के साथ सिस्टर-सिटी संबंध स्थापित करने और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार महोत्सव का उद्देश्य छात्रों और युवा शोधकर्ताओं में गीता अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ाना, विश्वविद्यालयों में गीता आधारित शोध को प्रोत्साहित करना तथा भारत-जापान के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन मॉरीशस, लंदन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और इंडोनेशिया में हो चुके हैं। जापान इस श्रृंखला का सातवां अंतरराष्ट्रीय मेजबान देश बना।
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