भोपाल , जुलाई 16 -- मध्यप्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में राहत मिली है। उच्च स्तरीय जाति जांच समिति ने विस्तृत जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति (बागरी) प्रमाणपत्र को वैध माना है।

समिति की जांच रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध अभिलेखों में कहीं भी प्रतिमा बागरी या उनके परिवार के राजपूत समुदाय से संबंधित होने का प्रमाण नहीं मिला। इसके विपरीत वर्ष 1950 से लेकर वर्तमान तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक रिकॉर्ड, जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन संबंधी दस्तावेज और अन्य शासकीय अभिलेख परिवार को बागरी समुदाय का बताते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। समिति ने विशेष रूप से स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती राजस्व रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना, जिनमें परिवार की जाति बागरी दर्ज है।

जांच के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों के जाति प्रमाणपत्र, शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड तथा विभिन्न शासकीय दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया। सभी अभिलेखों में परिवार की जाति बागरी दर्ज पाई गई और किसी भी दस्तावेज में उन्हें राजपूत समुदाय का नहीं बताया गया।

समिति ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता परिवार के राजपूत होने के समर्थन में कोई राजस्व रिकॉर्ड, वंशावली, शैक्षणिक दस्तावेज, जन्म संबंधी रिकॉर्ड अथवा अन्य सरकारी अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। केवल मौखिक दावों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना गया।

उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय जाति जांच समिति ने विभिन्न विभागों से अभिलेख मंगवाकर उनका सत्यापन किया। जांच पूरी होने के बाद समिति ने निष्कर्ष निकाला कि प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र वैध है और उसे निरस्त करने का कोई आधार नहीं है।

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