नयी दिल्ली , मई 15 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल नगर पालिका भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस ने राज्य भर के विभिन्न नगर पालिकाओं में अवैध नियुक्तियों को बढ़ावा देने के बदले कथित तौर पर कई फ्लैट और करोड़ों रुपये नकद प्राप्त किए थे।

ईडी ने श्री बोस को गुरुवार को नगर पालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था और बाद में उन्हें कोलकाता के बिचार भवन स्थित विशेष अदालत में पेश किया था, जहां से उन्हें आगे की जांच के लिए 10 दिनों की हिरासत में भेज दिया गया।

जांच के दौरान, ईडी ने श्री बोस का बयान दर्ज करने के लिए उन्हें कई बार समन जारी किया था। हालांकि, उन्होंने कथित तौर पर सहयोग नहीं किया और आधिकारिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए एजेंसी के सामने पेश होने से बचते रहे। ईडी ने दावा किया कि अपनी अंतिम पेशी के दौरान भी उन्होंने गोलमोल जवाब दिए और पूरी पूछताछ के दौरान असहयोग किया।

धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच से पता चला है कि श्री बोस को कथित तौर पर कई व्यक्तियों के लिए नौकरियों की व्यवस्था करने के बदले मिले कई फ्लैट मिले। इसके अलावा, ईडी ने आरोप लगाया कि उन्होंने करोड़ों रुपये नकद हासिल किए, जिन्हें बाद में उनके कथित व्यावसायिक उद्यमों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया।

ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। एजेंसी ने इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य के मामले में एक आवेदन दायर किया था, जिसमें राज्य भर में नगर पालिका भर्तियों में कथित अनियमितताओं का विवरण देने वाली एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी गई थी।

इससे पहले, 2023 में प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी की जांच के दौरान अयान सिल और अन्य से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई थी।

इन छापों के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे। इन दस्तावेजों की जांच से कथित तौर पर पता चला कि यह घोटाला केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, कमरहाटी, टीटागढ़, बरानगर, हलिसहर, दक्षिण दमदम (उत्तर) और दमदम सहित कई नगर पालिकाओं में नियुक्तियां शामिल थीं।

कथित अनियमित नियुक्तियों में मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क, चपरासी, एम्बुलेंस अटेंडेंट, सहायक मिस्त्री, पंप ऑपरेटर, हेल्पर, सेनेटरी असिस्टेंट और ड्राइवर जैसे पद शामिल थे।

ईडी के अनुसार, प्रश्न पत्र छापने, ओएमआर शीट, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने के लिए विभिन्न नगर निगमों और नगर पालिकाओं से संबंधित अनुबंध एक ही कंपनी मैसर्स एबीएस इन्फोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए थे, जिसके प्रमुख अयान सिल हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया कि अयान सिल ने अन्य लोक सेवकों, राजनीतिक नेताओं और व्यक्तियों के साथ मिलकर ओएमआर शीट में हेरफेर करने और पैसे तथा अन्य लाभों के बदले अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्तियों को सुविधाजनक बनाने की साजिश रची थी।

श्री बोस से जुड़े कार्यालय और आवासों सहित कई स्थानों पर ईडी द्वारा पहले की गई तलाशी में कथित तौर पर आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और लगभग 3.45 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी जब्त की गई थी।

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