जयपुर , मार्च 23 -- राजस्थान में राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भीलवाड़ा के पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान न्यायिक अधिकारी के खिलाफ दिए गए बयान स्वतः अदालत की अवमानना नहीं माने जाएंगे।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारी किसी न्यायालय के निर्देशों के तहत चल रही आधिकारिक जांच में अपने बयान दर्ज करते हैं और वे बयान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, तो उन्हें आपराधिक अवमानना की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के दौरान केस डायरी में दर्ज टिप्पणियां, भले ही उनमें किसी न्यायिक अधिकारी के प्रति आलोचना या आरोप हों, तब तक अवमानना नहीं मानी जाएंगी जब तक उनका उद्देश्य न्यायपालिका की छवि धूमिल करना या उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रसारित करना न हो।
इस मामले में भीलवाड़ा के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान स्वतंत्र रूप से तथ्य दर्ज करना आवश्यक है और इसे दबाने के लिए अवमानना कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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