फगवाड़ा , मार्च 30 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व और राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शन वाली सरकार की पिछले छह महीनों से पंजाब में लोकपाल की नियुक्ति न करने की पूर्ण विफलता और जानबूझकर की गई निष्क्रियता की कड़ी आलोचना की।

श्री खैरा ने कहा कि आठ अक्टूबर 2025 को जस्टिस (रिटायर्ड) विनोद कुमार शर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद से लोकपाल पंजाब का महत्वपूर्ण संवैधानिक कार्यालय खाली पड़ा है। उन्होंने इस देरी को "चौंकाने वाला, अस्वीकार्य और राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं को कमजोर करने के लिए आप सरकार के बेईमान इरादे का स्पष्ट संकेत" करार दिया। उन्होंने कहा कि श्री केजरीवाल भ्रष्टाचार के विरोध के नाम पर सत्ता में आए और उन्होंने एक मजबूत एवं स्वतंत्र लोकपाल प्रणाली का वादा किया था। विडंबना यह है कि आज पंजाब में उनकी अपनी ही पार्टी ने पिछले छह महीनों से उत्तराधिकारी की नियुक्ति न करके लोकपाल संस्था को निष्क्रिय बना दिया है।"उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार की निष्क्रियता इसकी पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल उठाती है। उन्होंने जोर दिया कि क्या यह पूरी तरह से अक्षमता है या जांच से बचने के लिए एक सोची-समझ़ी रणनीति? लोकपाल पद को खाली रखकर, सरकार ने प्रभावी रूप से उस स्वतंत्र प्रहरी को हटा दिया है जो उच्चतम स्तरों पर भ्रष्टाचार की जांच कर सकता था।

श्री खैरा ने आरोप लगाया कि यह देरी केवल प्रशासनिक नहीं है, बल्कि सरकार के भीतर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का एक सुनियोजित कदम प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब विभिन्न विभागों में वित्तीय अनियमितताओं, सार्वजनिक धन के गबन और अधिकार के दुरुपयोग के कई आरोप सामने आ रहे हैं, लोकपाल की अनुपस्थिति बेहद चिंताजनक है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार स्वतंत्र निगरानी से डरी हुई है।

मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए श्री खैरा ने कहा, "पंजाब सरकार का 'भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस' का तथाकथित नारा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। एक तरफ आप ईमानदारी के बड़े-बड़े दावे करते हैं, और दूसरी तरफ आप उसी संस्था को पंगु बना देते हैं जिसे जवाबदेही तय करनी है।" उन्होंने इस मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, "खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ योद्धा बताने वाले केजरीवाल पंजाब में लोकपाल की नियुक्ति न होने पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? क्या यह दोहरा मापदंड उन लोगों के साथ विश्वासघात नहीं है जिन्होंने आप के वादों पर भरोसा किया था?" उन्होंने पंजाब सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि लोकपाल की नियुक्ति में छह महीने से अधिक की देरी क्यों हुई है?क्या वैधानिक चयन प्रक्रिया भी शुरू की गई है?इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार है?श्री खैरा ने चेतावनी दी कि संस्थाओं को जानबूझकर कमजोर करने के पंजाब के शासन पर दीर्घकालिक हानिकारक परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, "लोकपाल केवल एक पद नहीं है, यह जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास का प्रतीक है। इसे खाली रखकर आप सरकार ने एक खतरनाक संदेश दिया है कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ है।" तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने पंजाब सरकार से आग्रह किया कि बिना किसी देरी के लोकपाल पंजाब की नियुक्ति में तेजी लाकर उसे पूरा करें। एक पारदर्शी और समयबद्ध चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करें। स्वतंत्र निगरानी तंत्र को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत करके भ्रष्टाचार विरोधी उपायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करें।

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