चंपावत , जून 01 -- जल संरक्षण और प्राकृतिक जल स्रोतों के संवर्धन को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से उत्तराखंड के चंपावत जिले में एक से 15 जून तक जल उत्सव सप्ताह की शुरुआत हो गई है। इस दौरान जिलेभर में विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका परिषद चंपावत की अध्यक्ष प्रेमा पांडेय ने किया। वहीं, जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रिज्यूविनेशन अथॉरिटी (सारा) की ओर से जनपद स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में जल स्रोतों को बचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसके लिए वन पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान, जल जीवन मिशन और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम भी जल संरक्षण से सीधे जुड़े हैं। यदि सभी विभाग और समुदाय मिलकर प्रयास करें तो जल संकट की चुनौती का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती ने कहा कि स्प्रिंगशेड प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़ी अवधारणाओं को धरातल पर उतारना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोत सुरक्षित रह सकें।

कार्यशाला में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. शोबन सिंह रावत ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभाग करते हुए नौलों और धारों के संरक्षण, उनके जलस्तर एवं डिस्चार्ज बढ़ाने के वैज्ञानिक उपायों पर जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण को पर्वतीय क्षेत्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

सारा के नोडल अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विमल कुमार सूंठा ने बताया कि जल उत्सव सप्ताह के दौरान जनपद, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण और वर्षा जल संचयन के प्रति प्रेरित करना है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि यदि जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा जाए तो सूखते नौले-धारे पुनर्जीवित हो सकते हैं और भविष्य के जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

चंपावत में शुरू हुआ यह जल उत्सव सप्ताह जल संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जो लोगों को पानी की हर बूंद के महत्व का संदेश देगा और जल बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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